हिंदी सिनेमा के कुछ गाने आम लोगों की जिंदगी से जुड़े होते हैं, जो हम सभी की जिंदगी की जरूरतों को दिखाते रहते हैं. कुछ गाने दिहाड़ी मजदूरों से लेकर कॉर्पोरेट एम्प्लॉई तक अपना जुड़ाव महसूस करते हैं. 55 साल पहले एक ऐसा ही गाना आया था, जिसे आज तक कॉर्पोरेट एम्प्लॉई खुद से जोड़कर देख सकते हैं. राजेश खन्ना के इस गाने की एक-एक लाइन इतनी दमदार है कि हर किसी को अपनी कॉर्पोरेट लाइफ आंखों के सामने दिखने लगेगी.इस गाने का नाम 'दुनिया में रहना है तो काम कर प्यारे' है.
किशोर कुमार की अमर आवाज
1971 की सुपरहिट फिल्म 'हाथी मेरे साथी' का यह गाना सिर्फ एक मधुर धुन नहीं, बल्कि जीवन का सच बयां करता है. 'दुनिया में रहना है तो काम कर प्यारे' गाने को राजेश खन्ना पर फिल्माया गया है. जबकि किशोर कुमार ने अपनी आवाज से अमर बनाया है.वहीं आनंद बक्शी के सीधे-सादे बोल और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जीवंत धुन मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं कि सुनने वाला खुद को मेहनत के रास्ते पर चलने के लिए मजबूर महसूस करे. 'दुनिया में रहना है तो काम कर प्यारे, हाथ जोड़ सबको सलाम कर प्यारे' – ये लाइन आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उस समय थीं.
फिल्म की कहानी
'हाथी मेरे साथी' दक्षिण भारतीय निर्माता सैंडो एम.एम.ए. चिन्नाप्पा थेवर की देवर फिल्म्स की प्रोडक्शन थी, जिसे एम.ए. थिरुमुगम ने निर्देशित किया. स्क्रीनप्ले सलीम-जावेद का था. राजेश खन्ना ने मूल स्क्रिप्ट पसंद न आने पर सलीम-जावेद को बुलाया था. फिल्म अनाथ राजू (राजेश खन्ना) और उसके चार हाथियों के अटूट रिश्ते की कहानी है, जिसमें तनु (तनुजा) की भूमिका भी अहम है. गाना सड़क किनारे तमाशा करते हुए किरदार है, जहां राजू हाथियों के साथ प्रदर्शन करता है. किशोर कुमार की आवाज़ में यह गाना मेहनत, ईमानदारी और आत्म-सम्मान का संदेश देता है.
'हाथी मेरे साथी' हुई बड़ी हिट
'हाथी मेरे साथी' 1971 में साल की सबसे बड़ी हिट बनी. भारत में नेट कलेक्शन लगभग 3.5 करोड़ रुपये और ग्रॉस 7 करोड़ रुपये रहा, जो उस समय का रिकॉर्ड था. सोवियत संघ में भी यह फिल्म बहुत सफल रही. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का साउंडट्रैक इतना लोकप्रिय हुआ कि 'हाथी मेरे साथी' पर रिलीज होने वाला यह पहला भारतीय ग्रामोफोन रिकॉर्ड था जिसे सिल्वर डिस्क मिला. आनंद बक्शी के बोल और किशोर-राजेश खन्ना की जोड़ी ने गाने को अमर बना दिया.
हाथी नहीं भूला तनुजा को
फिल्म में इस्तेमाल हुए हाथियों में से एक ने सालों बाद तनुजा को पहचान लिया था, जब वे बेटी काजोल के साथ सर्कस गई थीं, तो हाथी ने उनकी पल्लू पकड़ ली थी. लूसी लियू जैसी हॉलीवुड स्टार भी बचपन में इस फिल्म की फैन थीं. गाना सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि उस दौर की सामाजिक सोच को भी दर्शाता है कि बिना मेहनत के रोटी नहीं मिलती. आज भी यह गाना युवाओं को प्रेरित करता है – काम करो, सलाम करो, और दुनिया को अपने तरीके से जीतो.
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