शादी का सीजन आते ही कुछ गाने अपने आप सुनाई देने लगते हैं. मेहंदी की रस्म हो, दुल्हन की सहेलियों की मस्ती या घर में बजती ढोलक की थाप, एक खास गाने की धुन माहौल को तुरंत रंगीन बना देती है. इस गाने को रिलीज हुए करीब 25 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसका क्रेज आज भी कम नहीं हुआ है. नई पीढ़ी भी इसे उतने ही उत्साह से सुनती है, जितना कभी 2000 के दशक की शादियों में सुना जाता था. अल्का याग्निक की सुरीली आवाज और करिश्मा कपूर का खूबसूरत अंदाज इसे खास बनाता है. वो गाना है 'मेहंदी है रचनेवाली.'
करिश्मा कपूर की अदाओं ने गाने को बनाया यादगार
2001 में रिलीज हुई फिल्म जुबैदा का यह गाना आज भी शादी-ब्याह की रौनक बढ़ाने के लिए खूब बजाया जाता है. गाने में करिश्मा कपूर का ट्रेडिशनल अंदाज, उनकी खूबसूरत अदाएं और चेहरे के एक्सप्रेशंस दर्शकों का ध्यान खींचते हैं. इसलिए गाने की लोकप्रियता सिर्फ इसकी धुन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका विजुअल ट्रीटमेंट भी लोगों के जेहन में बस गया.
'मेहंदी है रचनेवाली' को अल्का याग्निक ने अपनी मधुर आवाज दी है. गाने के संगीत की कमान दिग्गज संगीतकार ए. आर. रहमान ने संभाली, जबकि इसके खूबसूरत बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं. गीत में शादी की रस्मों, रिश्तों की गर्माहट और उत्सव का ऐसा रंग दिखाई देता है, जो इसे बाकी शादी वाले गानों से अलग पहचान देता है.
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पीढ़ियां बदली, लेकिन ....
फिल्म जुबैदा का निर्देशन मशहूर डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने किया था. फिल्म में करिश्मा कपूर के साथ मनोज बाजपेयी अहम भूमिका में नजर आए थे. फिल्म की कहानी गंभीर और इमोशनल थी, लेकिन इसका यह गाना दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहा. करीब ढाई दशक बाद भी 'मेहंदी है रचनेवाली' शादी समारोहों में उतना ही पसंद किया जाता है. वक्त के साथ म्यूजिक की पसंद बदली, नए गाने आए, लेकिन मेहंदी की रस्म का यह सदाबहार गीत आज भी लोगों को झूमने पर मजबूर कर देता है.
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