कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं होतीं, बल्कि हौसले, संघर्ष और उम्मीद की मिसाल बन जाती हैं. मध्य प्रदेश के सागर में रहने वाले सुनील लोधी की कहानी भी ऐसी ही है. जन्म से दृष्टिबाधित सुनील ने कभी स्कूल की पढ़ाई नहीं की, लेकिन अपनी मधुर आवाज के दम पर उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना भी शायद उन्होंने कभी नहीं की थी. आज उनकी आवाज फिल्म ‘हनुमान अंश' के लोकप्रिय बुंदेली भजन ‘मैंने तुम्हारे भरोसे हनुमान सागर में नैया डाल दई' के जरिए देशभर में सुनी जा रही है. कभी जीवन की मुश्किलों से टूट चुके सुनील आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
संघर्षों के बीच पला-बढ़ा एक अनोखा हुनर
सागर निवासी सुनील लोधी जन्म से दृष्टिबाधित हैं. बचपन से ही उन्हें सामान्य बच्चों की तुलना में कहीं ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ा. आर्थिक रूप से भी परिवार बहुत मजबूत नहीं था. इसी वजह से सुनील कभी स्कूल नहीं जा सके. हालांकि, संगीत में उनकी रुचि बचपन से ही थी और धीरे-धीरे गायन उनकी पहचान बनता गया.

जब जिंदगी से हार मानने का ख्याल आया
सुनील बताते हैं कि उनके जीवन में एक दौर ऐसा भी आया, जब वे बेहद निराश हो गए थे. एक बार दोस्तों के साथ नदी किनारे घूमने के दौरान वे उनसे बिछड़ गए. उस समय अकेलेपन और परेशानी ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया. हालात ऐसे बन गए कि उनके मन में जिंदगी को लेकर नकारात्मक विचार आने लगे. उन्हें लगने लगा कि आगे का रास्ता बेहद मुश्किल है.
दोस्त रोहित ने बदली जिंदगी की दिशा
मुश्किल वक्त में उनके दोस्त रोहित ने उनका साथ नहीं छोड़ा. रोहित ने उन्हें हिम्मत दी और उनकी आवाज को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद सुनील ने बुंदेली भजन गाने शुरू किए. रोहित उनके भजनों को रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर अपलोड करने लगे. धीरे-धीरे लोगों को उनकी आवाज पसंद आने लगी और उनके गाने ज्यादा लोगों तक पहुंचने लगे.
मुंबई की एक रील बनी किस्मत बदलने का जरिया
सुनील की जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया, जब वे अपने दोस्त रोहित के साथ मुंबई गए. वहां वर्सोवा बीच पर उन्होंने एक रील बनाई, जिसमें उन्होंने अपनी गायकी का हुनर दिखाया. सोशल मीडिया पर यह रील लोगों का ध्यान खींचने लगी. इसी दौरान फिल्म ‘हनुमान अंश' से जुड़े लोगों की नजर भी सुनील पर पड़ी.

‘हनुमान अंश' में मिला बड़ा मौका
बताया जाता है कि फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने सुनील को मुंबई बुलाया. मुलाकात और बातचीत के बाद उन्हें फिल्म ‘हनुमान अंश' में भजन गाने का अवसर मिला. यह मौका उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. जिस युवक ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा, वह अब फिल्म के लिए प्लेबैक सिंगिंग कर रहा था.
वायरल रील ने दिलाई पहचान
फिल्म रिलीज के शुरुआती दौर में दर्शकों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा था. इसी बीच सुनील ने अपने गाए भजन को लेकर सोशल मीडिया पर एक रील पोस्ट की. यह रील तेजी से वायरल हो गई. बताया जाता है कि एक ही दिन में इसे करीब 10 लाख व्यूज मिले. रील की लोकप्रियता के साथ फिल्म की चर्चा भी बढ़ने लगी और लोगों ने फिल्म में खास दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी.

भजन बना सुनील की नई पहचान
फिल्म में गाया गया बुंदेली भजन आज सुनील की पहचान बन चुका है. लोग उनकी आवाज को पसंद कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी उन्हें भरपूर सराहना मिल रही है. सुनील का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी गायकी उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाएगी.
संघर्ष से सफलता तक का सफर
सुनील लोधी की कहानी यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी डिग्री, स्कूल या आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती. जन्मजात दृष्टिबाधिता, आर्थिक परेशानियां और जीवन की कठिन परिस्थितियां भी उनके सपनों को नहीं रोक सकीं. आज सागर के सुनील अपनी आवाज के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं और यह बता रहे हैं कि अगर हौसला मजबूत हो तो मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी मंजिल तक ले जाता है.
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