शाहिद कपूर, अविनाश तिवारी और तृप्ति डिमरी द्वारा अभिनीत और निर्देशक विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित फिल्म ‘ओ रोमियो' 13 फरवरी को रिलीज के लिए तैयार है. फिल्म में जहां शाहिद कपूर एक गैंगस्टर का किरदार निभा रहे हैं, वहीं अविनाश तिवारी एक ऐसे किरदार में नजर आएंगे जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया. इस फिल्म में वह एक मेटाडोर का किरदार निभा रहे हैं और इस किरदार के लिए उन्होंने शारीरिक और मानसिक तौर पर खास तैयारी की है. एनडीटीवी के साथ खास बातचीत में अविनाश तिवारी ने इस फिल्म और अपने किरदार के बारे में बात की—
प्रश्न: एक अभिनेता के तौर पर आपकी यात्रा में ‘ओ रोमियो' आपके लिए कहां बैठती है?
ओ रोमियो, सबसे पहले तो मेरे लिए एक बहुत ही शानदार मौका रहा. एक तो इसलिए कि मुझे विशाल भारद्वाज के साथ काम करने का मौका मिला, और वह भी साजिद नाडियाडवाला जैसे देश के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक की फिल्म में. इस किरदार के जरिये मुझे एक ऐसा खलनायक गढ़ने का मौका मिला जिसे लोग याद रखें, और विशाल सर के साथ मिलकर उसे तैयार करना मेरे लिए सपने जैसा था. विशाल सर की फिल्मों को देखें तो उनके खलनायक हमेशा यादगार रहे हैं, और मुझे लगा कि मैंने अपने ऊपर एक बड़ी जिम्मेदारी ले ली है.
मेरे पूरे अभिनय सफर में यह सबसे रोमांचक और संतोष देने वाली यात्राओं में से एक रही है, क्योंकि मुझे लगा कि इस किरदार पर मेरा पूरा अधिकार है. यह सब विशाल सर की वजह से संभव हुआ. उन्होंने मुझे जिस तरह की आजादी और भरोसा दिया कि मैं खुलकर उड़ान भर सकूं, वह बात मैं जिंदगी भर याद रखूंगा.
प्रश्न: आप चाहते हैं कि दर्शक आपके किरदार के बारे में क्या समझें, भले ही वे उसके फैसलों से सहमत न हों?
मैं किरदार को सही ठहराने या दर्शकों को उसे समझाने नहीं बैठना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि उसमें लालच, सपने और महत्वाकांक्षा थी, और ये वो गुण नहीं हैं जिन्हें मैं चाहता हूं कि कोई सही ठहराए या समझे.
लेकिन उसके करीबी रिश्तों के लिए जो संवेदनशीलता थी, मुझे लगता है कि दर्शक उसे समझ पाएंगे. तो मैं यही चाहता हूं कि वे उस पहलू को समझें, भले ही वे उसके फैसलों से सहमत न हों.
प्रश्न: इस फिल्म में आप बिल्कुल अलग रूप में दिखते हैं, क्या आपने इस किरदार के लिए कोई खास दिनचर्या अपनाई?
सच कहूं तो अगर आपने मेरा काम देखा है तो आप समझेंगे कि मैं हर बार एक अलग इंसान लाने की कोशिश करता हूं, और उसी से हर बार अलग रूप सामने आता है.
इस किरदार के लिए मेरी तैयारी ज्यादातर शारीरिक थी. इस रोल के लिए मुझे अपना शरीर बहुत मजबूत बनाना था, और अच्छी बात यह थी कि मैं पहले से ही एक दूसरी फिल्म के लिए शरीर बना रहा था, जिससे मुझे एक आधार मिल गया.
मेरे पास तैयारी के लिए सिर्फ करीब 20 दिन थे, और चूंकि मैं एक मेटाडोर का किरदार निभा रहा था, तो शरीर की भाषा और कुछ खास भाव-भंगिमाओं की तैयारी करनी थी. मैंने थोड़ा फ्लेमेंको भी सीखा ताकि उसका आधार बन सके, क्योंकि मेरे पास स्पेन जाने का समय नहीं था.
मानसिक और भावनात्मक तौर पर, मुझे अपने भीतर की ठंडक, गुस्सा और लड़ने के कारण ढूंढने थे. इसके लिए कोई तय दिनचर्या नहीं थी, यह ज्यादा सहज था. कसरत, मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग, तलवारबाजी और फ्लेमेंको की ट्रेनिंग बहुत मददगार रही.
विशाल भारद्वाज की फिल्मों की एक अलग ऑडियंस होती है और उनकी फिल्में हमेशा एक अलग लीग में अपनी पहचान बनाती हैं. उनकी फिल्मों का संगीत खासतौर पर लोकप्रिय होता है और उनकी कहानियों के नायक भी अक्सर ग्रे शेड्स में नजर आते हैं. ‘ओ रोमियो' की बात करें तो इसका संगीत भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है और अविनाश तिवारी के किरदार के लुक को भी जमकर वाहवाही मिल रही है.
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