नाना पाटेकर जो अपनी एक अलग अंदाज की एक्टिंग और दमदार स्टाइल के लिए जाने जाते रहे हैं. उन्होंने अपने फिल्मी करियर में 50 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है. जिसमें सिर्फ उनकी अदाकारी ही नहीं बल्कि उनके कुछ डायलॉग ऐसे भी हैं जिन्हें सुनकर फिल्म याद आ जाती है. या फिर ये रहा जाए कि फिल्म के उस किरदार को पहचान ही नाना ने दी है. फिल्म की कहानी को जीवित करने में एक कलाकार का सबसे बड़ा रोल होता है, और नाना पाटेकर उन कलाकारों मे एक थे. बॉलीवुड में नाना पाटेकर का नाम इसी कैटेगरी में आता है.
नाना कभी गुस्से से भरी आवाज, कभी मजाकिया अंदाज और कभी एकदम शांत अंदाज में कही गई बातों से लोगों के ऊपर एक अलग ही छाप छोड़ते थे. नाना ने अपने डायलॉग डिलीवरी से कई किरदारों को यादगार बना दिया. एक अच्छे कलाकार की निशानी वही होती है कि वो अपने किरदार को पूरी तरह से जिए, ये खूबी नाना पाटेकर जी में थी. वेलकम के उदय शेट्टी से लेकर अग्नि साक्षी फिल्म में विश्वनाथ से लेकर के हर किरदार को नाना पाटेकर ने पूरी तरह जिया है. उनके कई डायलॉग आज भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं और मीम्स का हिस्सा बनते हैं. चलिए आपको बताते हैं नाना के 10 वो डायलॉग्स जो आज भी लोगों के बीच लोगों के बीच खूब सुने जाते हैं.
‘क्रांतिवीर' का वो सीन, जो लिखा ही नहीं गया था
1. 1994 में आई फिल्म क्रांतिवीर का डायलॉग- 'आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने'. ये नाना पाटेकर के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में से एक गिनी जाती है. इस फिल्म में प्रताप नारायम ने तिलक का किरदार निभाया था, इसके साथ फिल्म में डिंपल कपाड़िया, डैनी डेन्जोंगपा और परेश रावल ने काम किया था. फिल्म के क्लाइमेक्स में नाना का लंबा भाषण आज तक याद किया जाता है. सबसे खास बात ये है कि इसको लिखा नहीं गया था, बल्कि सीन के दौरान उन्होंने उसे खुद से बोला था. यही वजह है कि सीन में उनकी आवाज और गुस्सा बेहद स्वाभाविक नजर आता है.
2. क्रांतिवीर फिल्म का ही एक और डायलॉग- 'ये मुसलमान का खून है और ये हिंदू का…' एक फेमस डायलॉग था. इस फिल्म ने धर्म के नाम पर इंसानों को बांटने की सोच पर सवाल उठाया था.
3. क्रांतिवीर फिल्म "कुत्ते की तरह जीने की आदत है सबको... इज्जत से जीना है तो खुद लड़ना सीखो.
4. साल 2007 में आई फिल्म वेलकम जो एक कॉमेडी फिल्म थी. इसमें नाना पाटेकर ने उदय शेट्टी का किरदार निभाया था. इस फिल्म के भी कई डायलॉग थे जो आज भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए और आज भी इनके खूब मीम्स बनते हैं. फिल्म का एक दो शब्दों का डायलॉग जो था 'शांत उदय'.
5. इसी के साथ फिल्म का एक दूसरा डॉयलाग था जिसमें वो एक फिल्म की शूटिंग के दौरान सब्जी वाले बने हैं. सब्जी बेचते समय उनका एक डॉयलाग आज भी बहुत फेमस है. 'सुबह से ना हीं एक आलू बिका है ना ही आधा कांदा.'
यह भी पढ़ें | नाना पाटेकर की कैसे हुई मौत? गोवा के अस्पताल में बचाने की 45 मिनट की कोशिश नाकाम रही
6. साल 1997 में आई फिल्म यशवंत का डॉयलाग "एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है...!
7. साल 1996 में आई फिल्म अग्निसाक्षी का डायलॉग, "साला, ये दुख काहे खत्म नहीं होता बे!
8. साल 1993 में आई फिल्म तिरंगा का डायलॉग, पहले लात, फिर बात, मुलाकात!
9. साल 2010 में आई फिल्म राजनीति से भी उनका एक डॉयलाग काफी फेमस हुआ, 'फैसले सही या गलत नहीं होते, वक्त और हालात के हिसाब से होते हैं.'
10. साल 2004 की फिल्म अब तक छप्पन का डायलॉग, 'दो तरह के लोग होते हैं... एक जो ऊपर जाना चाहते हैं, दूसरे जो नीचे रहना चाहते हैं.'
नाना की खासियत यही रही कि उनका डायलॉग सिर्फ शब्द नहीं लगता था. उनकी आवाज, उसमें ठहराव, चेहरे के भाव और गुस्से से लेकर कॉमेडी तक, वो हर लाइन में अपना अलग रंग भर देते थे. शायद यही वजह है कि उनके किरदार खत्म होने के बाद भी उनके डायलॉग लोगों के बीच जिंदा रहते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं