90 के दशक में कई रोमांटिक गानों की बाढ़ आई थी, लेकिन उन रोमांटिक गानों में कुछ दर्दभरे गाने भी मौजूद थे, जिसमें प्यार के दर्द से लेकर दूर जाने का डर भी नजर आता था. 90 के दशक के दर्दभर गाने आज भी अक्सर आपको बस, ट्रक और ऑटोरिक्शा में खूब सुनने को मिल सकते हैं. ऐसा ही उन दिनों का एक गाना है, जिसका एक-एक शब्द आशिकों के दिलों को चीर सकता है. इस गाने का नाम 'जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं'.
मुन्नी बेगम से प्रेरित गाना
यह दर्दभरा गाना 1993 में आई फिल्म कसम तेरी कसम का हिस्सा है. यह गाना मशहूर शायर सबा अफगानी ने लिखा है. संगीत निखिल-विनय ने दिया और 'जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं' गाने दिग्गज सिंगर सोनू निगम ने अपनी खूबसूरत आवाज में गाया है. दिलचस्प बात यह है कि इस गाने की धुन पाकिस्तानी गायिका मुन्नी बेगम की मशहूर गजल “जिंदगी की राहों में” से प्रेरित है. मुन्नी बेगम की मूल रचना में वही दर्द भरी रही थी.इंडियन वर्जन में सोनू निगम की मधुर और भावुक आवाज़ ने इसे नया रूप दिया. गाने की लंबाई लगभग सात मिनट है और यह दर्द भरे गानों में टॉप पर है.
फिल्म के बारे में
'कसम तेरी कसम' फिल्म 24 दिसंबर 1993 को रिलीज हुई. निर्देशन रमन कुमार ने किया और निर्माता गुलशन कुमार थे. मुख्य कलाकार कृष्ण कुमार, कंचन, नीता पुरी, कुनिका, अनुपम खेर, किरण कुमार, मोहनीश बहल, रजा मुराद और आलोक नाथ थे. 'जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं' गाना साउंडट्रैक अल्बम का हिस्सा बना. बाद में यही गाना 'बेवफा सनम वॉल्यूम 3' अल्बम में भी शामिल किया गया, जहां कुछ वर्जन में अनुराधा पौडवाल की आवाज भी जुड़ी. टी-सीरीज ने इसे आधिकारिक रूप से जारी रखा और आज भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाखों बार सुना जाता है.
गाने का असर और यादगार पल
नब्बे के दशक के दर्द भरे गानों में 'जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं' गाना अलग पहचान रखता है. सोनू निगम की शुरुआती करियर की यादों से जुड़ा यह गाना आज भी पुरानी यादों को ताजा कर देता है. गाने ने कई लोगों के दिल में जगह बनाई क्योंकि यह सिर्फ फिल्मी गाना नहीं, आम इंसान के अकेलेपन की आवाज बन गया.
यह भी पढ़ें | 27 साल पुराना वो गाना, जो गाया 7 सिंगर्स ने मिलकर, NRI दिलों का बना एंथम
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं