बाप-बेटे का रिश्ता बेहद खास होता है. हिंदी सिनेमा में इस रिश्ते पर कई फिल्में और गाने भी बन चुके हैं. 57 साल पहले बाप-बेटे पर एक गाना आया था, जिसने हर पीढ़ी के लोगों को प्रेरित किया. इस गाने में बाप का बेटे के लिए प्यार देखते ही बनता है. इस गाने का नाम 'तुझे सूरज कहूं या चंदा' है. जो साल 1969 की आई फिल्म 'एक फूल दो माली' का है. 'तुझे सूरज कहूं या चंदा' गाने में एक बाप अपने बेटे से बचपन से ही काफी उम्मीदें लगाता हुआ दिखाई देता है.
मन्ना डे की आवाज ने बनाया अमर
जब मन्ना डे की मधुर आवाज में यह गाना सुनाई देता है, तो दिल में बाप-बेटे का पवित्र रिश्ता गूंजने लगता है. 'एक फूल दो माली' का यह सदाबहार नगमा सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि हर माता-पिता की असीम ममता का प्रतीक माना जाता है. सूरज, चंदा, दीप या तारा,बच्चे को क्या कहूं? यह सवाल हर पिता के दिल से निकलता है. रवि के संगीत और प्रेम धवन के बोल ने 'तुझे सूरज कहूं या चंदा' गाने को अमर बना दिया. बलराज साहनी के किरदार के होठों पर यह गाना जब बजता है, तो आंखें नम हो जाती हैं.
आज भी लोकप्रिया है गाना
मन्ना डे ने इसे इतनी भावपूर्ण आवाज दी कि आज भी लाखों लोग इसे सुनकर अपने पिता या बच्चे को याद करते हैं. प्रेम धवन के बोल-'मेरा नाम करेगा रोशन, जग में मेरा राज दुलारा'- हर पिता की उम्मीद को दर्शाते हैं. रवि का सरल पर भावुक संगीत और संतूर-बांसुरी का स्पर्श इसे और गहरा बनाता है.'तुझे सूरज कहूं या चंदा' की लोकप्रियता इतनी है कि यूट्यूब पर इसके करोड़ों व्यूज हैं और यह अभी भी पुरानी यादों को ताजा करता है.
बड़ी हिट साबित हुई फिल्म
'एक फूल दो माली' देवेन्द्र गोयल द्वारा निर्देशित और निर्मित है. फिल्म की कहानी संपत लाल पुरोहित की किताब 'दो कदम आगे' पर आधारित है. संजय खान, साधना और बलराज साहनी की कहानी में प्यार, बलिदान और परिवार का मर्म है. 1969 में 'एक फूल दो माली' सुपर हिट रही और तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. नेट कलेक्शन लगभग 2.50 करोड़ रुपये था. संगीत रवि का था, जिसमें यह गीत सबसे भावनात्मक माना जाता है.
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