1969 में एक फिल्म आई, जिसके एक गाने में औलाद वालों को दुआ देता एक गरीब नजर आया. इसे मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने अपनी आवाज से सदाबहार बनाया. वहीं आज मोहल्ले की गलियों में यह 57 साल पुराना खूब सुनने को मिलता है, जिसके जरिए गरीब अमीर परिवारों को औलाद होने की दुआ देता है. हम बात कर रहे हैं 1969 की सुपरहिट फिल्म एक फूल दो माली की, जिसका गाना औलाद वालों फूलों फलों आज भी फैंस की बीच फेमस है.
औलाद वालों गाने के बोल...
औलाद वालों, फूलों-फलों
भूखे गरीब की ये ही दुआ है
औलाद वालों, फूलों-फलों
तेरा घर बच्चों से भरा रहे
ये बाग हमेशा हरा रहे
गुड़िया-गुड्डा बाजा मोटर
इक शोर हमेशा मचा रहे
भूखे गरीब की ये ही दुआ है
औलाद वालों, फूलों-फलों
गीतकार रवि द्वारा तैयार किया गया यह गाना आज भी फैंस के दिलों को इमोशनल करता है. वहीं मोहम्मद रफी की आवाज कानों में गूंजती है.
57 साल पुराने गाने के पीछे की कहानी
देवेन्द्र गोयल के निर्देशन में बनीं एक फूल दो माली में संजय खान, साधना और बलराज साहनी अहम किरदार में नजर आए थे. कहानी गरीब परिवार की लड़की सोमना (साधना) की है, जिसकी मुलाकात अमर (संजय खान) से होती है और दोनों को प्यार हो जाता है. लेकिन पर्वतारोहण पर गया अमर लापता हो जाता है और सब उसे मरा हुआ समझ लेते हैं. वहीं सोमना गर्भवती होती है, जिसके बाद विधुर कैलाश (बलराज साहनी) मदद करने के लिए उससे शादी करता है और बेटे बॉबी को नाम देता है. वहीं औलाद वालों फूलों फलों को दो हिस्सों में फिल्माया गया है. एक जब विधुर कैलाश का परिवार खत्म हो जाता है और वह गाना गाकर रोटी कमाने वालों पर गुस्सा करता है. जबकि दूसरा हिस्सा जब वह बॉबी का पिता बन जाता है तो उन गाना गाने वालों को बक्शीश देते हुए आता है.
एक फूल दो माली के अन्य गाने
औलाद वालों फूलों फलों के अलावा एक फूल दो माली फिल्म में 7 गाने और हैं, जिसमें सजना सजाना ओ सजना (आशा भोसले), ये पर्दा हटा दो (मोहम्मद रफी, आशा भोसले), सैयां ले गई जिया (आशा भोसले), तुझे सूरज कहूं या चंदा (मन्ना डे), ओ नन्हें से फरिश्ते (मोहम्मद रफी), किसमत के खेल निराले (रवि) और चल चल रे नौजवान (मोहम्मद रफी, आशा भोसले) है.
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