प्यार, मोहब्बत, रिश्ते, दर्द, भक्ति, नोक झोंक, सोशल मैसेज आप नाम लें और ऐसा हो ही नहीं सकता कि किसी भारतीय फिल्म में उस भाव से जुड़ा कोई गाना ना हो. इन अलग अलग भावों पर कई अलग अलग और कई यादगार गाने बने लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गाने के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने अकेले ही एक दो तीन नहीं बल्कि सात भाव जाहिर किए थे. ये गाना कई साल पुराना है लेकिन इसके बोल और भाव ऐसे हैं कि ये आज भी प्रासंगिक लगता है.
63 साल पहले आई थी फिल्म 'दिल एक मंदिर'
साल 1963 में राजकुमार, मीना कुमारी और राजेंद्र कुमार की एक फिल्म आई थी 'दिल एक मंदिर'. इस फिल्म में राजेंद्र कुमार डॉक्टर के किरदार में थे. मीना कुमारी पहले राजेंद्र कुमार से प्यार किया करती थीं. उनकी शादी राजकुमार से पक्की हो जाती है. आगे चलकर राजकुमार को कैंसर हो जाता है. राजेंद्र कुमार उनका इलाज करते हैं. फिल्म एक ऐसा मोड़ आता है जब राजकुमार को पता चल जाता है कि उनकी जिंदगी ज्यादा नहीं बची है. ऐसे में वह मीना कुमारी से कहते हैं कि वे राजेंद्र कुमार से शादी कर ले. ये बात मीना का दिल दुखा देती है ऐसे मोड़ पर फिल्म में गाना आता है 'हम तेरे प्यार में सारा आलम'.
आठ लाइन में सात इमोशन
पंछी से छुड़ाकर उसका घर
तुम अपने घर पर ले आए
ये प्यार का पिंजरा मन भाया
हम जी भर-भर के मुस्काए
जब प्यार हुआ इस पिंजरे से
तुम कहने लगे आज़ाद रहो
हम कैसे भुलाएं प्यार तेरा
तुम अपनी जुबां से ये न कहो
इसे पढ़कर ही आप समझ सकते हैं इस गाने में लेखक ने शिकायत, लगाव, सदमा, अनुरोध, समर्पण, व्यथा, निःस्वार्थ प्रेम जैसे भाव एक पैराग्राफ में समेट कर रख दिए. बात करें इस गाने के महान लेखक की तो वो कोई और नहीं हसरत जयपुरी थे जिन्होंने इतना पेचीद काम इस आसानी से कर दिया. गाने को संगीत से सजाया शंकर जय किशन ने और अपनी आवाज से अमर कर गईं लता मंगेशकर.
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