एक जमाना था जब लोग गाने के म्यूजिक के साथ उसके बोल को भी खूब पसंद करते थे. 62 साल पहले एक फिल्म आई थी, जिसके एक गाने ने रेडियो पर धूम मचा दी थी. इस फिल्म का नाम 'संगम' है. जब राज कपूर ने वैजयंतीमाला को 'संगम' में राधा का रोल ऑफर किया, तो उन्होंने मना कर दिया. उन दिनों फोन नहीं होते थे. राज साहब ने टेलीग्राम भेजा, 'बोल राधा बोल, संगम होगा की नहीं?' वैजयंतीमाला ने जवाब दिया, 'होगा, होगा, होगा.' यही वाक्य शैलेंद्र के बोल और शंकर-जयकिशन के सुरों में बदलकर 1964 का सबसे बड़ा हिट बन गया. मुकेश और वैजयंतीमाला की आवाज में यह डुएट आज भी दिलों को छूता है.
गीत का जादू और संगीत की कहानी
'बोल राधा बोल, संगम होगा की नहीं?' गाने में 'मेरे मन की गंगा और तेरे मन की जमुना का'—दो नदियों के संगम की तरह दो दिलों के मिलन की बात होती है. इस गाने को शैलेंद्र ने लिखा, शंकर-जयकिशन ने धुन दी. बिनका गीतमाला 1964 की सालाना लिस्ट में यह नंबर वन था. फिल्म का पूरा साउंडट्रैक 1960 के दशक का सबसे ज्यादा बिकने वाला अल्बम बना. 'बोल राधा बोल, संगम होगा की नहीं?' गाना पानी में शूट हुआ, जहां वैजयंतीमाला ने पहली बार स्विमसूट पहना. राज कपूर को उनकी दादी से पैरों पर बैठकर इजाजत लेनी पड़ी थी.
फिल्म का जादू
राज कपूर, वैजयंतीमाला और राजेंद्र कुमार का यह लव ट्राएंगल राज कपूर की पहली पूरी तरह से रंगीन फिल्म थी. यह हिंदी सिनेमा की पहली फिल्म थी जो यूरोप, स्विट्जरलैंड, पेरिस, लंदन में बड़े पैमाने पर शूट हुई. 238 मिनट लंबी यह फिल्म उस समय की सबसे महंगी और लंबी फिल्मों में से एक थी. संगम ने लगभग 8 करोड़ रुपये की कमाई की. 1964 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म और दशक की दूसरी सबसे बड़ी हिट बनी. ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित हुई. फिल्मफेयर में बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्ट्रेस और बेस्ट एडिटिंग राज कपूर को मिले. गाना ने 1992 की फिल्म ‘बोल राधा बोल' का टाइटल भी प्रेरित किया.
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