प्यार और मेहंदी का रिश्ता सदियों पुराना है. हाथों में मेहंदी रचने के साथ उसमें अपने प्रिय का नाम छिपाने की परंपरा और उससे जुड़ी शरारतों को हिंदी फिल्मों और गानों में भी कई बार खूबसूरती से पेश किया गया है. 90 के दशक में आया एक ऐसा ही रोमांटिक गीत आज भी अपनी सादगी भरी धुन और प्यार में डूबे बोलों की वजह से याद किया जाता है. अनुराधा पौडवाल की आवाज में सजा यह गाना शुरू होता है- "लिख के मेहंदी से सजना का नाम..." इस गाने की सबसे बड़ी खूबसूरती इसके बोल हैं. मेहंदी लगे हाथों में अपने सजना का नाम लिखना, फिर उस नाम के साथ दिल की भावनाओं को जोड़ देना, गीत को एक पारंपरिक रोमांटिक एहसास देता है. यही वजह है कि सुनते ही यह गाना सीधे शादी, मेहंदी और प्यार से जुड़े उन पुराने पलों की याद दिलाने लगता है.
90s में खूब पसंद किया गया मेहंदी का गाना
गीत में प्रेमिका के मन की खुशी और अपने प्रिय के प्रति प्यार को बेहद सहज अंदाज में पिरोया गया है. बोलों में बनावटीपन नहीं, बल्कि वही सीधी-सादी मोहब्बत है, जो 90 के दशक के कई रोमांटिक गानों की पहचान हुआ करती थी.
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मेहंदी, प्यार और सजना को समेटे हुए गाना
इस गीत को अनुराधा पौडवाल ने अपनी आवाज दी है. उनकी मधुर और भावनात्मक गायकी गाने के रोमांटिक मूड के साथ अच्छी तरह मेल खाती है. धुन में भी वही नरमाहट है, जो सुनने वाले को धीरे-धीरे गाने के बोलों से जोड़ती चली जाती है. गीत का संगीत और बोल ललित सेन ने तैयार किए थे. ‘इश्क हुआ' एल्बम का यह गाना उस दौर के उन गीतों में शामिल है, जिनकी पहचान बड़े फिल्मी सेट या चमक-दमक से ज्यादा उनकी मेलोडी और सरल रोमांटिक भावनाओं से बनती है.
मेहंदी, प्यार और अपने सजना के नाम को लेकर लिखे गए इस गाने का विषय ही ऐसा है, जो कभी पुराना नहीं पड़ता. शायद यही वजह है कि सालों बाद भी "लिख के मेहंदी से सजना का नाम..." सुनते ही 90 के दशक की रोमांटिक म्यूजिक वाली दुनिया की याद ताजा हो जाती है. शायद इसी सादगी में इस गाने की वह खूबसूरती छिपी है, जिसने इसे आज भी यादगार बनाए रखा है.
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