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This Article is From Jun 24, 2019

हताश और निराश पार्टी को छोड़ आखिर कहां हैं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव?

आरजेडी सूत्रों की मानें तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव ने फ़ोन कर उन्हें पटना वापस जाने की सलाह दी है. लेकिन अभी तक इसका कोई असर होता नहीं दिखाई दे रहा है.

हताश और निराश पार्टी को छोड़ आखिर कहां हैं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव?
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से नहीं दिखे हैं
पटना:

बिहार विधान सभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव कहां हैं ये एक रहस्य बनता जा रहा है. इसके साथ ही एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या तेजस्वी पटना में नहीं रहना चाहते हैं.  राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेताओं जैसे रघुवंश प्रसाद सिंह और शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी के पटना से बाहर रहने पर चिंता ज़ाहिर की है आपको बता दें कि  तेजस्वी करीब एक महीने से पटना से बाहर हैं. वह इस बीच अपने घर पर इफ़्तार हो या मुज़फ़्फ़रपुर में बच्चों की मौत सबसे खुद को दूर रखा है. आरजेडी सूत्रों की मानें तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव ने फ़ोन कर उन्हें पटना वापस जाने की सलाह दी है. लेकिन अभी तक इसका कोई असर होता नहीं दिखाई दे रहा है. सबसे ज़्यादा तनाव में पार्टी के विधायक नज़र आ रहे हैं. उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव के परिणाम के आने के बाद तेजस्वी के रुख की वजह से पार्टी जितना हताश और निराश है उतना तो 2010 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी नहीं हुई थी. 

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पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मानते हैं कि अगर यही हालात रहे तो आने वाले कुछ समय में विधायक अपने क्षेत्र के समीकरण के अनुसार यह जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) या बीजेपी में जाने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे लेकिन उसके पहले तेजस्वी यादव की कार्यशैली के बारे में उंगली उठाना नहीं बोलेंगे. वहीं पार्टी के कुछ लालू यादव के विश्वस्त करीबियों का कहना है कि तेजस्वी का जो अभी तक का व्यवहार रहा है वो निश्चित रूप से समझ से परे है. लेकिन शायद एक लोकसभा और दो विधानसभा का उप चुनाव जीतने के बाद शायद उन्हें ग़लतफ़हमी हो गई थी कि उनके पास इतने पर्याप्त वोटें हैं  कि मुख्यमंत्री बनने की सपना पूरा करने के लिए उन्हें साथ किसी की ज़रूरत नहीं है. 

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लेकिन सच्चाई यही है कि अधिकांश विधायक मानते हैं कि आरजेडी के टिकट पर और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में कोई उन्हें चुनाव नहीं  जिता  सकता है. लेकिन एक बार फिर अगर नीतीश कुमार का साथ हो जाए तो उन्हें कोई हरा भी नहीं सकता. तेजस्वी यादव के रवैए से सहयोगी दल भी ख़फ़ा हैं. जैसे कांग्रेस पार्टी के नेता हों या जीतन राम मांझी या मुकेश निषाद. सब सार्वजनिक और निजी बातचीत में अब उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार मानना तो दूर उनके साथ भविष्य की राजनीति करने पर पुनर्विचार कर रहे हैं. 

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