- राजद, कांग्रेस ने मीडिया द्वारा आलोचना करने पर नीतीश का किया समर्थन
- कहा- मंगल पांडेय को बचाने के लिए जानबूझकर नीतीश को निशाना बनाया
- विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पटना में रहने के बावजूद सदन में नहीं आए
बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में सोमवार को राज्य में एक्यूट एन्सेफलायटिस सिंड्रोम से बच्चों की मौत पर बहस हुई. यह बहस कई कारणों से याद रहेगी. विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के नेताओं का ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तुरंत मंजूर करके बहस करवाई.
हालांकि बहस के बहाने विपक्ष के नेताओं ने एक स्वर में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के इस्तीफे की मांग की. पांडेय जब इस मुद्दे पर जवाब दे रहे थे तब सदन का बहिष्कार किया गया. लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने बोलना शुरू किया, सब फिर सदन में वापस आ गए. विपक्ष के नेता भाषण में जहां स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के कार्यकलाप को लेकर आक्रामक रहे वहीं नीतीश कुमार के प्रति उनका रुख काफी नरम दिखा.
विपक्ष के नेताओं जैसे राजद (RJD) के अब्दुल बारी सिद्दीकी और कांग्रेस (Congress) के सदानंद सिंह ने तो नीतीश कुमार की मीडिया के एक वर्ग द्वारा आलोचना किए जाने पर प्रश्न उठाया. उन्होंने यहां तक कह डाला कि उनको जानबूझकर निशाने पर इसलिए रखा गया ताकि मंगल पांडेय और उनसे पूर्व के भाजपा मंत्रियों को बचाया जा सके. भाजपा के एक विधायक ने कहा कि निश्चित रूप से आज की बहस से यह साफ था कि जैसे कुछ चैनल अपने राजनीतिक एजेंडा की मजबूरी से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ सारी सीमा पार कर गए वैसे ही विपक्ष अपने राजनीतिक भविष्य के मद्देनजर नीतीश कुमार की आलोचना से बच रहा था.
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नीतीश कुमार ने अपने भाषण के अंत में राजद के भाई वीरेंद्र से कहा भी कि याद नहीं हैं, आपके चुनाव में भाषण में क्या-क्या हम बोले थे. हालांकि यह बहस इस बात के लिए भी याद रखी जाएगी कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पटना में रहने के बावजूद सदन में नहीं आए.
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