नीतीश कुमार और शरद यादव (फाइल फोटो)
- नीतीश कुमार और शरद यादव में कुछ समय से तल्खी चल रही है
- शरद यादव को पार्टी ने निकालने की तैयारी है.
- चुनाव आयोग में दोनों की लड़ाई पार्टी दावेदारी को लेकर पहुंची थी.
नई दिल्ली:
चुनाव आयोग ने आज साफ कर दिया है कि जनता दल यूनाइटेड पार्टी और पार्टी का चुनाव चिह्न नीतीश कुमार के पास ही रहेगा. चुनाव आयोग ने शरद यादव की याचिका को तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया है. इसी के साथ अब शरद यादव के राजनीतिक भविष्य पर चर्चाएं होने लगी हैं. माना जा रहा है कि जल्द ही पार्टी ने राज्यसभा से बाहर करने के लिए अपनी मांग पर आगे कदम उठाएगी. बिहार में महागठबंधन से अलग होकर जेडीयू के बीजेपी के साथ चले जाने के बाद से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शरद यादव की लड़ाई पार्टी पर दावे तक पहुंच गई थी. एक ओर जहां जेडीयू ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मिलकर उनकी राज्यसभा की सदस्यता रद्द करने की मांग की, तो शरद यादव का खेमा पार्टी पर दावा जताने के लिए चुनाव आयोग के पास पहुंच गया था. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने शरद यादव को लेकर कहा ता, अगर वह नई पार्टी बनाना चाहते हैं, तो कोई उन्हें रोक सकता है क्या...? लेकिन उन्हें जितनी पब्लिसिटी 40 साल में मिली, अब उन्हें उससे जुदा पब्लिसिटी मिल रही है, लेकिन याद रहे, मीडिया जिसे उठाता है, उसे पटकने में भी समय नहीं लगाता.
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वैसे, शरद यादव अब सितंबर के अंतिम सप्ताह में चार-दिवसीय दौरा कर जनता से सीधे संवाद करने जा रहे हैं. 25 सितंबर से शुरू हो रही इस यात्रा में शरद यादव के सभी कार्यक्रम 'संवाद यात्रा' के अंतर्गत ही आयोजित किए जाएंगे, और वह भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, गया और औरंगाबाद जाकर जनता से मिलेंगे. उधर, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का कहना है कि शरद यादव की इस यात्रा का कोई अर्थ नहीं रह गया है.
पढ़ें : भागलपुर रैली में गरजे तेजप्रताप, बोले- मेरी मां दुर्गा है और मैं दुर्गा का शेर हूं
नीतीश और शरद के बीच की यह लड़ाई बिल्कुल वैसी ही है, जैसी उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच समाजवादी पार्टी में वर्चस्व को लेकर छिड़ी थी. वैसे, जेडीयू की बात करें, तो अब तक के दावों और समर्थन को देखकर कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार का पलड़ा भारी है.
जेडीयू ने बीते साल ही पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में शामिल सदस्यों की सूची चुनाव आयोग को दी है, जिसमें कुल 193 सदस्य हैं. यह सूची राजगीर सम्मेलन के समय जारी की गई थी और इसी सम्मेलन में शरद यादव के प्रस्ताव के बाद पार्टी ने नीतीश कुमार को अध्यक्ष बनाया था. राष्ट्रीय परिषद की सूची पर जेडीयू महासचिव जावेद रज़ा के हस्ताक्षर हैं और अब वह शरद यादव के साथ खड़े हैं. लेकिन कुल सदस्यों में से ज्यादातर नीतीश कुमार के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. यह नई सूची जेडीयू के दूसरे महासचिव केसी त्यागी की ओर से चुनाव आयोग की दी गई थी. केसी त्यागी, नीतीश कुमार के समर्थन में खड़े हैं, जबकि करीब 30-40 सदस्य केरल के सांसद वीरेंद्र कुमार के साथ हैं, जो जेडीयू से अलग हो चुके हैं.

चुनाव आयोग किसी भी पार्टी में वर्चस्व को लेकर सबसे पहले यही देखता है कि पार्टी सदस्य, पदाधिकारी, सांसद और विधायक किसके साथ ज्यादा संख्या में खड़े हैं.
VIDEO : नीतीश कुमार ने दी चुनौती
वहीं, जेडीयू के अपने संविधान के मुताबिक भी कोई सदस्य दो बार से ज्यादा पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं रह सकता है, जबकि शरद यादव लगातार तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके अलावा यह भी किसी से छिपा नहीं है कि बीजेपी के साथ जाने के फैसले पर पार्टी के ज्यादातर विधायकों का समर्थन है.
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वैसे, शरद यादव अब सितंबर के अंतिम सप्ताह में चार-दिवसीय दौरा कर जनता से सीधे संवाद करने जा रहे हैं. 25 सितंबर से शुरू हो रही इस यात्रा में शरद यादव के सभी कार्यक्रम 'संवाद यात्रा' के अंतर्गत ही आयोजित किए जाएंगे, और वह भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, गया और औरंगाबाद जाकर जनता से मिलेंगे. उधर, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का कहना है कि शरद यादव की इस यात्रा का कोई अर्थ नहीं रह गया है.
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नीतीश और शरद के बीच की यह लड़ाई बिल्कुल वैसी ही है, जैसी उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच समाजवादी पार्टी में वर्चस्व को लेकर छिड़ी थी. वैसे, जेडीयू की बात करें, तो अब तक के दावों और समर्थन को देखकर कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार का पलड़ा भारी है.
जेडीयू ने बीते साल ही पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में शामिल सदस्यों की सूची चुनाव आयोग को दी है, जिसमें कुल 193 सदस्य हैं. यह सूची राजगीर सम्मेलन के समय जारी की गई थी और इसी सम्मेलन में शरद यादव के प्रस्ताव के बाद पार्टी ने नीतीश कुमार को अध्यक्ष बनाया था. राष्ट्रीय परिषद की सूची पर जेडीयू महासचिव जावेद रज़ा के हस्ताक्षर हैं और अब वह शरद यादव के साथ खड़े हैं. लेकिन कुल सदस्यों में से ज्यादातर नीतीश कुमार के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. यह नई सूची जेडीयू के दूसरे महासचिव केसी त्यागी की ओर से चुनाव आयोग की दी गई थी. केसी त्यागी, नीतीश कुमार के समर्थन में खड़े हैं, जबकि करीब 30-40 सदस्य केरल के सांसद वीरेंद्र कुमार के साथ हैं, जो जेडीयू से अलग हो चुके हैं.

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वहीं, जेडीयू के अपने संविधान के मुताबिक भी कोई सदस्य दो बार से ज्यादा पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं रह सकता है, जबकि शरद यादव लगातार तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके अलावा यह भी किसी से छिपा नहीं है कि बीजेपी के साथ जाने के फैसले पर पार्टी के ज्यादातर विधायकों का समर्थन है.
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