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कल्पना पटवारी का बज्जिका भाषी छठ गीत रिलीज, रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल सुन भक्ति में डूबे फैंस, कहा- जय छठी मईया

लोक गायिका कल्पना पटवारी ने अपना नया छठगीत रिलीज कर दिया है, जिसमें वह बज्जिका भाषा में गाती हुईं नजर आ रही हैं. इस गीत को फैंस का खूब प्यार मिल रहा है और उनकी तारीफ कर रहे हैं.

कल्पना पटवारी का बज्जिका भाषी छठ गीत रिलीज, रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल सुन भक्ति में डूबे फैंस, कहा- जय छठी मईया
कल्पना पटवारी का बज्जिका छठ गीत रिलीज, रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल को मिला प्यार
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छठ महापर्व के अवसर पर लोकगायिका कल्पना पटवारी सात छठगीतों की विशेष ‘छठ गीतमाला' लेकर आई हैं, जिस संगीतमय प्रस्तुति में मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका भाषाओं के गीत शामिल हैं. इसकी शुरुआत कल्पना पटवारी के जगत के पालक दीनानाथ से हुई थी. जबकि अब बज्जिका भाषा में कल्पना पटवारी ने अपना नया छठगीत रिलीज कर दिया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और फैंस उनकी गायकी की तारीफ करते हुए नजर आ रहे हैं और जय छठी मैया कहते हुए दिख रहे हैं.  

कल्पना पटवारी का नया बज्जिका छठगीत

अपने सोशल मीडिया पर नए छठ गीत का वीडियो शेयर करते हुए कल्पना पटवारी ने लिखा, बज्जिका भाषी छठ व्रतियों के बीच प्रचलित है यह छठ गीत. इस गीत में व्रती छठ पर्व में असमय वर्षा होने से उत्पन्न स्थिति को गीत गाकर व्यक्त करती है. छठी माता से अपनी भावना व्यक्त करते हुए व्रती छठी माता से सहाय होने की प्रार्थना करती है. छठी माता के स्वागत में आंगन लिपाने, फूल बिछाने, हवन कराने, फल फूल से भरे डाली अर्पण करने, कोसिया भरने, छठ घाट पर नटुआ नचाने, बाजा बजवाने की भावना व्यक्त करती है. फिर कहती है कि जल बीच खड़ा होके उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पण करके व्रत को पूरा करेगी. नोट: काटे गए शब्दों को छोड़कर पाठ उतारा गया है. मूल की स्थानीय भाषा और व्याकरण यथावत रखे गए हैं.

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कल्पना पटवारी ने कही ये बात

कल्पना पटवारी ने कहा कि असम की होने के बावजूद बिहार की लोकसंस्कृति और गौरवशाली विरासत के प्रति उनके मन में गहरा अनुराग है. उन्होंने बताया कि बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग से राष्ट्रीय कला पुरस्कार मिलने के बाद भी उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक परंपराओं के लिए काम करने की अपनी इच्छा साझा की थी. इसी भावना के साथ वह इस छठ पर्व पर बिहार की अलग-अलग भाषाओं में छठगीत प्रस्तुत कर रही हैं. उनके अनुसार, एक ही गायिका द्वारा बिहार की पांच भाषाओं में सात छठगीतों की प्रस्तुति एक दुर्लभ प्रयास है.

कल्पना पटवारी के 5 भाषाओं में छठगीत 

इस गीतमाला में मैथिली के ‘चारि पहर राति जल थल सेविलहुँ' और ‘कातिक मास इजोरिया', भोजपुरी के ‘जगत के पालक दीनानाथ' और ‘दरसन मांगीला तोहार हे गंगा मैया', मगही के ‘छोटी मुटी मालिन बेटी के भुइयाँ लोटे केस', अंगिका के ‘छठि मइया अइतई अंगनमा सजन हम करबई बरतिया' तथा बज्जिका के ‘रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल ओरियानी मोती चूए' गीत शामिल हैं.  गीतों का संकलन हृदय नारायण झा की पुस्तक ‘छठगीत (सर्वसौभाग्यदायकम्)' से किया गया है.  

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