वन्दना यादव साहित्यकार, मोटिवेशनल स्पीकर और समाजसेवी हैं. उनके अब तक तीन उपन्यास समेत 25 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. वन्दना ने सेना के परिवेश और सेना में महिलाओं के जीवन पर काफी कुछ लिखा है. उन्होंने 'सैनिक पत्नियों की डायरी'और 'सैनिक पत्नियों की कथा और व्यथा' समेत आधा दर्जन से अधिक पुस्तकों का संपादन किया है. वन्दना के उपन्यासों पर देश के कई विश्वविद्यालयों में शोध हो रहा है. लेखन और साहित्य में योगदान के लिए उन्हें कई सम्मानों से सम्मानित किया गया है. उनकी रचनाओं का अंग्रेजी, उर्दू, उड़िया, मराठी, हरियाणवी आदि भाषाओं में अनुवाद हुआ है. उनकी किताब 'सब्जियों वाले गमले' एनबीटी की बेस्ट सेलिंग किताबों की सूची में शामिल है.