Viral News: कनाडा के टोरंटो में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती ने 155 साल बाद उत्तर प्रदेश के बलिया में अपना पैतृक गांव खोज निकाला. 75 साल के इमतेज और उनकी पत्नी वर्नी अलाय के पास साल 1871 का एक पुराना कागज था, जिसकी मदद से उन्हें 15 दिन की तलाश के बाद अपने खरसरा ग्राम पंचायत के बेलौना टोला गांव का रास्ता मिल गया. अपनी पुरखों की जमीन पर कदम रखते हुए उनके आंसू छलक पड़े.
दो अंग्रेजों के साइन वाला कागज
बुजुर्ग कपल के पास जो कागज है, वो असल में इमिग्रेशन पेपर है, जिस पर उस वक्त दो अंग्रेजी अधिकारियों ने साइन किए थे और उनके पुरखों का पता भी लिखा था. इसी पते को लेकर यह दंपती 3 अक्टूबर को पंचायत सचिव मिथिलेश कुमार पांडेय से मिला. इसके आधार पर करीब 15 दिन खोज चली, जिसके बाद सही लॉकेशन मिल गई. हालांकि सचिव ने साफ किया कि अभी तक बुजुर्गों के पुश्तैनी घर का पता नहीं चला है.
मजदूर बनाकर भेजे गए थे कनाडा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमतेज ने बताया, 'मेरी दादी, उनकी बहन और भाई बलिया के इसी गांव से कोलकाता गए थे. उस वक्त मेरी दादी की उम्र 14 साल थी, जबकि उनके भाई-बहन 10 और 8 साल के थे. 1871 में इन सभी को मजदूर बनाकर कनाडा भेजा गया था. आज उसी पर्ची की बदौलत हम उनका पुराना पता खोज पाए हैं.'
अब इनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं.
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