लंदन:
एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए नाइजीरिया में किशोरी छात्राओं ने पेशाब से चलने वाला जनरेटर बनाया है, जो एक लीटर मूत्र को बिजली में बदल देता है और यह बिजली छह घंटे के लिए काफी है।
14 साल की दुरो आइना अदेबोला, अकीन्देले ऐबिओला, फेलेक ओलुवातोइन तथा 14 साल की बेलो ऐनिओला ने लागोस मे मेकर फेयर अफ्रीका व्यापार मेले में अपनी यह नई खोज पेश की है। उन्होंने बिजली बनाने के लिए एक ऐसे पदार्थ का इस्तेमाल किया है, जो मुफ्त, असीमित मात्रा में और आराम से उपलब्ध है।
मेकर फेयर ब्लॉग के अनुसार, इस नई खोज में मूत्र को एक इलेक्ट्रोलिटिक सेल में डाला, जिसने मूत्र को नाइट्रोजन, जल और हाइड्रोन में तब्दील कर दिया। इसके बाद शुद्धिकरण के लिए हाइड्रोन वाटर फिल्टर में गया, जिसे आगे गैस सिलेंडर में धकेला गया।
'डेली मेल' में यह खबर प्रकाशित हुई है। गैस सिलेंडर ने हाइड्रोजन को तरल बोरैक्स के सिलेंडर में भेजा, जिसका इस्तेमाल हाइड्रोजन गैस से नमी को अलग करने में किया जाता है। इस शुद्धिकृत हाइड्रोजन गैस को जनरेटर में भेजा गया, जहां एक लीटर मूत्र से छह घंटे तक चलने वाली बिजली बनाने में मदद मिली।
14 साल की दुरो आइना अदेबोला, अकीन्देले ऐबिओला, फेलेक ओलुवातोइन तथा 14 साल की बेलो ऐनिओला ने लागोस मे मेकर फेयर अफ्रीका व्यापार मेले में अपनी यह नई खोज पेश की है। उन्होंने बिजली बनाने के लिए एक ऐसे पदार्थ का इस्तेमाल किया है, जो मुफ्त, असीमित मात्रा में और आराम से उपलब्ध है।
मेकर फेयर ब्लॉग के अनुसार, इस नई खोज में मूत्र को एक इलेक्ट्रोलिटिक सेल में डाला, जिसने मूत्र को नाइट्रोजन, जल और हाइड्रोन में तब्दील कर दिया। इसके बाद शुद्धिकरण के लिए हाइड्रोन वाटर फिल्टर में गया, जिसे आगे गैस सिलेंडर में धकेला गया।
'डेली मेल' में यह खबर प्रकाशित हुई है। गैस सिलेंडर ने हाइड्रोजन को तरल बोरैक्स के सिलेंडर में भेजा, जिसका इस्तेमाल हाइड्रोजन गैस से नमी को अलग करने में किया जाता है। इस शुद्धिकृत हाइड्रोजन गैस को जनरेटर में भेजा गया, जहां एक लीटर मूत्र से छह घंटे तक चलने वाली बिजली बनाने में मदद मिली।
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