- ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के पास UAE और सऊदी नेताओं द्वारा दिए गए दो अरब डॉलर के गुप्त बैंक खातों तक पहुंच थी
- डच खुफिया एजेंसी ने कुशनर के आईफोन का एक्सेस प्राप्त कर अमीरात के फर्स्ट अबू धाबी बैंक में गुप्त खाते खोजे थे
- बैंक खातों में जमा रकम का इस्तेमाल शांति समझौते के प्रयासों और गुप्त हथियार खरीद के लिए किया गया था
'वैनिटी फेयर' में बृहस्पतिवार को छपे एक किताब के अंश के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान उनके दामाद जेरेड कुशनर की उन गुप्त बैंक खातों तक पहुंच थी, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात के नेता मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) और सऊदी के शाही सदस्य मोहम्मद बिन सलमान (MBS) द्वारा दिए गए लगभग 2 अरब डॉलर जमा थे. बताया जाता है कि इजरायल के केंद्रीय बैंक में मौजूद इन खातों में से एक की देखरेख खुद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू करते थे.
ट्रंप के पहले और दूसरे, दोनों कार्यकालों में उनके करीबी सलाहकार रहे कुशनर ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है. इजरायल में अमेरिका के पूर्व राजदूत डेविड फ्रीडमैन ने भी इन आरोपों को खारिज किया है; कहा जाता है कि उन्होंने ही इस पूरी व्यवस्था को बनाने में मदद की थी.
कैसे पता लगा इस बैंक खाते का
रिपोर्ट के अनुसार, अमीरात के 'फर्स्ट अबू धाबी बैंक' में मौजूद पहला खाता डच खुफिया एजेंसी द्वारा खोजा गया था. उन्हें कुशनर के आईफोन को दूर से देखने का एक्सेस मिल गया था. ऐसा तब हुआ जब 2017 में एक रूसी 'डबल एजेंट' ने उस डिवाइस के कुछ स्क्रीनशॉट सामने रखे, जिसके बाद डच एजेंसी ने एक सिक्योरिटी एक्सप्लॉइट (सुरक्षा खामी) का पता लगाने के लिए 'रिवर्स-इंजीनियरिंग' की.
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यह रिपोर्ट पत्रकार मैथ्यू कोल की आने वाली किताब 'प्रिंसिस एंड थीव्स' का एक हिस्सा है. उनके अनुसार, बिन जायद और बिन सलमान ने मिलकर कम से कम दो बैंक खातों में लगभग 2 अरब डॉलर जमा किए, जिनका एक्सेस कुशनर के पास था. लेख के मुताबिक, अमीराती और सऊदी नेताओं ने किस तरीके से ये भुगतान किए, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन असल में उन्होंने इस खर्च को आपस में बांट लिया था.
पहला खाता आधिकारिक तौर पर 'वतनी अल इमारात फाउंडेशन' का था. यह एक चैरिटी संस्था है, जिसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सरकार से फंड मिलता है. इसका इस्तेमाल पहले से ही गुप्त रूप से हथियार खरीदने के लिए एक आड़ के तौर पर किया जा रहा था, जिसमें बिन ज़ायद और बिन सलमान दोनों का योगदान था.
नेतन्याहू की क्या भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, कुशनर और MBZ इसे इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच शांति समझौता कराने के अपने संयुक्त प्रयासों का हिस्सा मानते थे. आखिरकार, 2020 में ट्रंप प्रशासन ने अपनी तथाकथित "डील ऑफ द सेंचुरी" पेश की. कुशनर को 'वतनी' खाते का हस्ताक्षरकर्ता बनाया गया, जिससे उन्हें खाते का मालिकाना हक तो नहीं मिला, लेकिन वे इसे इस्तेमाल कर सकते थे. रिपोर्ट के अनुसार, अगर कुशनर सीनेट द्वारा मंजूर किए गए कोई अधिकारी होते—जैसे कि CIA के प्रमुख—तो यह उनके अधिकार क्षेत्र में आ सकता था, लेकिन वे ऐसे अधिकारी नहीं थे.
कोल ने ट्रंप प्रशासन के चार वरिष्ठ अधिकारियों (दो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ और CIA के एक पूर्व निदेशक) का हवाला देते हुए बताया कि उन्हें इस व्यवस्था के लिए राष्ट्रपति की ओर से कोई मंजूरी मिलने की जानकारी नहीं थी. रिपोर्ट के अनुसार, कुशनर के लिए इस व्यवस्था का खुलासा करना अनिवार्य था, और ऐसा न करके उन्होंने शायद अमेरिकी कानून का उल्लंघन किया है.
MBZ ने एक दूसरे खाते के जरिए कुशनर को लगभग 1 अरब डॉलर ट्रांसफर किए. नेतन्याहू ने ट्रंप के इस सहयोगी को सलाह दी कि वह इस रकम को 'बैंक ऑफ इजरायल' में जमा करे, जो कि देखने में एक सरकारी खाता लग रहा था. कोल ने "पैसे के बारे में जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति" का हवाला देते हुए बताया कि असल में यह रकम ट्रंप के इस सहयोगी के निजी फायदे के लिए दी गई थी.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेतन्याहू ने कुशनर से कहा था कि कोई भी लेन-देन करने से पहले उन्हें सूचित करें. इसमें यह भी कहा गया है कि दोनों ने उस समय के राजदूत फ्रीडमैन के जरिए इस बारे में जानकारी साझा की थी. पूर्व राजनयिक ने इस आरोप को "100 प्रतिशत झूठा" बताया, और कुशनर के वकील ने कहा कि ऐसा कोई खाता कभी था ही नहीं.
क्या अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन हुआ
रिपोर्ट में एक तीसरे खाते को लेकर हुई बातचीत का भी जिक्र है. माना जाता है कि यह खाता UAE के लिए एक तरह के "आपातकालीन रक्षा कोष" के तौर पर सोचा गया था. यह कुशनर की मध्यस्थता वाली उस गुप्त कूटनीति का हिस्सा था, जिसमें इजरायल ने ईरान के हमले की स्थिति में खाड़ी देश की रक्षा करने पर सहमति जताई थी. बाद में, इजरायल और UAE ने अमेरिका की मध्यस्थता में 'अब्राहम समझौते' पर हस्ताक्षर किए, जिससे उनके संबंध सामान्य हो गए. ईरान के साथ हालिया तनाव के बीच, दोनों देशों ने रक्षा के क्षेत्र में मिलकर काम किया है. कोल ने एक पूर्व अमेरिकी अभियोजक के हवाले से बताया कि कुल मिलाकर, इन गुप्त बैंक खातों से संभवतः अमेरिकी पारदर्शिता कानूनों का उल्लंघन हुआ है. इसके अलावा, यह रिश्वतखोरी और किसी विदेशी एजेंट के लिए गुप्त रूप से काम करने के दायरे में भी आ सकता है.
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