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पाकिस्तान में शुगर पीड़ितों के सामने बड़ा संकट, जर्मनी से ठप हुई इंसुलिन की सप्लाई; क्या वजह

पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता साजिद शाह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई की दिक्कतों के कारण इंसुलिन ग्लुलिसिन (एपिड्रा, सनोफी) अभी उपलब्ध नहीं है.

पाकिस्तान में शुगर पीड़ितों के सामने बड़ा संकट, जर्मनी से ठप हुई इंसुलिन की सप्लाई; क्या वजह
शुगर के मरीजों के लिए इंसुलिन बहुत जरूरी होता है. (फोटो-एनडीटीवी)
  • पाकिस्तान में टाइप 1 मधुमेह के मरीजों के लिए इंसुलिन ग्लुलिसिन की सप्लाई जर्मन निर्माता द्वारा रोक दी गई है
  • पाकिस्तान में लगभग तीन करोड़ पैंतालीस लाख लोग टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं
  • बताया गया कि अन्य रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन जैसे इंसुलिन एस्पार्ट और इंसुलिन लिस्प्रो की उपलब्धता मौजूद है

पाकिस्तान में इंसुलिन की कमी हो गई है. स्वास्थ्य मामलों के संसदीय सचिव नेल्सन अजीम ने शुक्रवार को बताया कि पाकिस्तान में टाइप 1 मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इंसुलिन की कमी हो गई है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इसके जर्मन निर्माता ने अपने उत्पादों को अपग्रेड करने के दौरान इसकी सप्लाई रोक दी है.

कितने मरीज हैं पाकिस्तान में शुगर के

नेशनल असेंबली में MNA सैयदा आमना बतूल द्वारा उठाए गए एक मुद्दे का जवाब देते हुए, अजीम ने कहा कि जून तक कोई कमी नहीं थी और सितंबर तक का स्टॉक उपलब्ध था. हालांकि, अक्टूबर में जर्मनी से होने वाली सप्लाई बाधित हो गई, जिसके कारण अभी यह कमी पैदा हो गई है. अजीम ने कहा, "इस कमी का असर न केवल यहां, बल्कि पूरे एशिया, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में भी महसूस किया जा रहा है. जैसे ही अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बहाल हो जाएगी, यह उत्पाद फिर से उपलब्ध हो जाएगा."

सचिव ने आगे बताया कि पाकिस्तान में इंसुलिन के ऐसे विकल्प आसानी से उपलब्ध हैं, जिनकी खुराक और काम करने का तरीका बिल्कुल वैसा ही है. मरीज अपने डॉक्टर की सलाह पर इनका इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं. उन्होंने कहा, "यह उत्पाद जर्मनी में बनता है. हम इस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं." हालांकि, बतूल ने इस बात पर चिंता जताई कि इलाज बदलने पर मरीजों को किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि ये विकल्प कम से कम 20 प्रतिशत अधिक महंगे हैं, और कई मरीजों की डॉक्टरों तक पहुंच ही नहीं है. उन्होंने कहा, "फिलहाल पाकिस्तान में लगभग 3.45 करोड़ लोगों को टाइप 1 डायबिटीज है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं. इसके कोई अन्य विकल्प आसानी से उपलब्ध नहीं हैं."

इंसुलिन ग्लुलिसिन की है सिर्फ कमी

अजीम ने बताया कि जर्मन निर्माता कंपनी ने पहले 3,500 किट की सप्लाई की थी, लेकिन अब यह घटकर 1,000 किट रह गई है. एक साल तक चलने वाली अपग्रेड प्रक्रिया के दौरान यह संख्या और भी कम हो सकती है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस उत्पाद को आयात करने वाले वितरकों से सप्लाई की व्यवस्था करने को कहा है, लेकिन साथ ही यह भी माना कि ऐसा करना मुश्किल होगा क्योंकि निर्माता कंपनी ने उत्पादन रोक दिया है. मंगलवार को अधिकारियों ने देश में इंसुलिन की भारी कमी की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि केवल एक ब्रांड उपलब्ध नहीं है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता साजिद शाह ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई की दिक्कतों के कारण इंसुलिन ग्लुलिसिन (एपिड्रा, सनोफी) अभी उपलब्ध नहीं है. इसी श्रेणी की अन्य रैपिड-एक्टिंग दवाएं, जैसे कि इंसुलिन एस्पार्ट (नोवोरैपिड, नोवो नॉर्डिस्क) और इंसुलिन लिस्प्रो (ह्यूमालॉग, एली लिली), पूरे देश में आसानी से मिल रही हैं." उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान में इंसुलिन की अन्य सभी मुख्य श्रेणियां पूरी तरह से उपलब्ध हैं. अगस्त 2025 में, पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन ने पूरे देश में जरूरी दवाओं की "अभूतपूर्व" और गंभीर कमी को लेकर चिंता जताई और चेतावनी दी थी कि इस संकट से लाखों मरीजों की जान को खतरा है. एसोसिएशन के अनुसार, कम से कम 80 महत्वपूर्ण दवाएं उपलब्ध नहीं थीं, जिनमें से 25 दवाओं का कोई विकल्प भी मौजूद नहीं था. इन दवाओं में डायबिटीज, कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसंस, हृदय रोग और मानसिक विकारों के इलाज के लिए जीवन रक्षक दवाएं शामिल थीं.

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