ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने चुनाव में ऐसी जीत हासिल की, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. उन्होंने अपनी कुर्सी बचा ली है. इस जीत के साथ वह रिकॉर्ड चौथी बार राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. इस महीने की शुरुआत में पहले चरण के चुनाव में चौंकाने वाली जीत हासिल करने वाले दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो के ब्राजील का अगला राष्ट्रपति बनने की उम्मीद की जा रही थी. लेकिन वामपंथी नेता और मौजूदा राष्ट्रपति लूला ने जोरदार वापसी की. उन्होंने दूसरे चरण के चुनाव में पूरे जोश के साथ प्रचार किया और 51.8 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की.
80 साल की उम्र में लूला दा सिल्वा ने जो कर दिखाया है उसके पीछे व्हाट्सएप, सोशल मीडिया और युवाओं का बड़ा रोल है. आजतक मोबाइल नहीं रखने वाले लूला ने पहले चरण के झटके के बाद मोबाइल तक ले लिया और यंग जेनेरेशन के साथ अपना कनेक्शन बना लिया. चलिए आपको लूला के इस कमबैक की कहानी बताते हैं. साथ ही हम उस किंगमेकर के बारे में भी बताएंगे जो कभी बस कंडक्टर था.
युवा सड़कों पर उतरे
पहले चरण के चुनाव में हार के बाद लूला के चुनाव प्रचार अभियान को झटका लगा था. लेकिन स्टूडेंट और युवा तुरंत सड़कों पर उतर आए. 'बोल्सोनारो फिर कभी नहीं' जैसे नारे लगाते हुए हजारों लोग रियो डी जनेरियो, साओ पाउलो और बेलो होरिजोंटे जैसे शहरों में जुटे. उन्होंने लूला, उनकी सामाजिक नीतियों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने के उनके वादे के समर्थन में रैलियां निकालीं. न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार गेटुलियो वर्गास फाउंडेशन (FGV) के राजनीतिक वैज्ञानिक एडुआर्डो ग्रिन ने कहा, "युवाओं की भागीदारी बहुत अहम थी."
उन्होंने AFP से कहा कि लूला की वर्कर्स पार्टी (PT) युवाओं से फिर से जुड़ने में कामयाब रही. खुद राष्ट्रपति लूला ने कहा कि उन्होंने 1984 के बाद ऐसा कुछ नहीं देखा था. उस समय ब्राजील में सैन्य शासन था और एक बड़े जन आंदोलन ने चुनाव कराने की मांग की थी.
काम पर लगी डिजिटल सेना
लूला ने पहले चरण के अपने चुनाव प्रचार अभियान को दशकों का सबसे "अव्यवस्थित" अभियान बताया था. रविवार के चुनाव से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रचार करने की अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी. मौजूदा राष्ट्रपति ने युवा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेताओं की मदद ली. उन्होंने अपना पहला मोबाइल फोन खरीदा और खुद को 'सेल्फी किंग' बताया.
इस बीच, उनके समर्थकों ने भी ऑनलाइन दुनिया में अपना अभियान तेज कर दिया. इसका मकसद राजनीतिक दक्षिणपंथियों के मजबूत ऑनलाइन कैंपेन का मुकाबला करना था. FGV के ओलिवर स्टुएनकेल ने AFP से कहा, "कई वामपंथी लोग हर दिन घंटों ऑनलाइन रहते थे. वे या तो पोस्ट करते थे या सड़कों पर जाकर मतदाताओं से बात करते थे."
36 साल की पब्लिसिस्ट ताइजा मेंडोंसा ने रियो में AFP से कहा, "सोशल नेटवर्क पर काम करना थका देने वाला था. मैंने अपने काम के घंटों के बाद भी काफी समय दिया. मुझे पता था कि मैं लूला के लिए काम कर रही हूं." उन्होंने आगे कहा कि उनकी 60 साल की उम्र वाली मौसियां भी हैशटैग शब्द सीख गई थीं.
बस कंडक्टर बना किंगमेकर

लूला को गले लगाते आंद्रे जानोनेस (ब्राजील की पीली जर्सी में)
उपर दिख रहे फोटो में लूला को गले लगाने वाले शख्स हैं आंद्रे जानोनेस, जो ब्राजील के सांसद हैं. उन्होंने ही इस व्हाट्सऐप चैनल (लूला की आर्मी) के जरिए मेटा और दूसरी टेक कंपनियों की रोक के बावजूद लूला के चुनाव प्रचार को नई दिशा दी. पहले चरण के चुनाव में हार के बाद उन्होंने प्रचार की रणनीति बदलने में अहम भूमिका निभाई. घरों में झाडू-बर्तन करने वालीं मां और दिव्यांग पिता के बेटे जानोनेस ने बस कंडक्टर के तौर पर काम करके अपनी कानून की पढ़ाई का खर्च उठाया था.
जानोनेस के व्हाट्सऐप चैनल पर पहले चरण के चुनाव के दौरान 60 हजार लोग जुड़े थे, लेकिन दूसरे चरण तक यह संख्या बढ़कर एक करोड़ के पार हो गई. इस चैनल पर उन्होंने 'लूला की सेना' बनाई. माना जा रहा है कि लूला की चुनाव में वापसी में जानोनेस की अहम भूमिका रही और इसी के लिए लूला ने उन्हें गले लगाकर सम्मान दिया. दिलचस्प बात यह है कि जानोनेस ने ही लूला को आखिरकार आईफोन खरीदकर इस्तेमाल करने के लिए मनाया था. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान ब्राजील की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की जर्सी को भी फिर से अभियान का हिस्सा बनाया, जिसे बोल्सोनारो समर्थकों ने अपना प्रतीक बना लिया था.
विरोधी को नापसंद करना
एडुआर्डो ग्रिन के मुताबिक सड़कों और सोशल मीडिया पर हुए अभियान ने लोगों के मन में बोल्सोनारो परिवार की सत्ता में वापसी का डर पैदा किया. साथ ही, लोकतंत्र और सामाजिक अधिकारों को लेकर चिंता भी बढ़ाई. 45 साल के फ्लावियो बोल्सोनारो को उनके पिता और पूर्व नेता जैर बोल्सोनारो ने राजनीतिक दक्षिणपंथ का नेतृत्व करने के लिए चुना था.
जायर बोल्सोनारो इस समय 27 साल की जेल की सजा काट रहे हैं. 2022 में लूला से चुनाव हारने के बाद उन्होंने तख्तापलट की कोशिश की थी. इसी मामले में उन्हें सजा हुई है. जायर बोल्सोनारो के शासन की आलोचना करने वाले लोग उनके कार्यकाल को बढ़ती भुखमरी, कोरोना महामारी से निपटने में खराब व्यवस्था, अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और पर्यावरण से जुड़ी ऐसी नीतियों के लिए याद करते हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन को नकारा गया था.
अपने पिता से काफी हद तक मिलता-जुलता चेहरा रखने वाले फ्लावियो ने चुनाव प्रचार के दौरान पिता जायर को अपना मार्गदर्शक बताया था. उन्होंने वादा किया कि अगर वह चुनाव जीतते हैं, तो अपने पिता को जेल से रिहा कराएंगे.
लूला ने लिए लोगों को खुश करने वाले फैसले
लूला ने चुनाव से पहले कई ऐसे फैसले किए, जिन्हें लोगों का समर्थन मिला. संसद ने एक सुधार को मंजूरी देकर उन्हें बड़ी जीत दिलाई. इस सुधार के तहत कर्मचारियों को हर हफ्ते दो दिन की छुट्टी मिलना सुनिश्चित किया गया है. यह लूला के चुनावी वादों में एक अहम वादा था. सरकार ने अक्टूबर महीने की कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली आर्थिक मदद की तारीख भी बदल दी.
पहले यह पैसा दूसरे चरण के चुनाव के बाद मिलना था, लेकिन सरकार ने इसे चुनाव से पहले देने का फैसला किया. इसके साथ ही छोटे कारोबारियों के कर्ज माफ करने की मुहिम भी शुरू की गई. सरकार ने कई अन्य लोकप्रिय फैसले भी किए. चुनाव प्रचार के दौरान एक इंटरव्यू में लूला ने कहा, "मैं सिर्फ इसलिए कोई ऐसी सुविधा देना बंद नहीं करूंगा, जिसे मैं दे सकता हूं, क्योंकि चुनाव होने वाले हैं."
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