झारखंड की राजधानी रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के संघर्ष का केंद्र बन गया है, जिसे अब 'रांची का जंतर-मंतर' कहा जा रहा है. 15 दिनों से जारी इस आंदोलन में छात्र निर्जला और आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिससे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो की हालत बिगड़ने लगी थी. उन्हें लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल कर पानी पीने के लिए मनाया.10 अगस्त को छात्रों ने पुराना विधानसभा से नए विधानसभा तक महाघेराव करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है.
इस आंदोलन और दिल्ली के जंतर-मंतर (NEET विवाद) के बीच एक बड़ा तुलनात्मक विश्लेषण देखने को मिला. जहां दिल्ली का आंदोलन मुख्य रूप से उच्च शिक्षा (Admission) और सोशल मीडिया रील्स पर केंद्रित था, वहीं रांची का आंदोलन सीधे रोजगार, नौकरी और अस्तित्व की लड़ाई है. इसमें झारखंड के दूर-दराज के इलाकों (जैसे दुमका और कोडरमा) से गरीब और किसान परिवारों के बच्चे कर्ज लेकर पहुंचे हैं. छात्रों ने संगीन आरोप लगाए हैं कि सिस्टम में नौकरियों के रेट कार्ड (डीएसपी के लिए ₹12 करोड़, सीजीएल के लिए ₹70 लाख) तय हैं और परीक्षा के दिन इंटरनेट बंद होने के बावजूद पेपर लीक हो जाते हैं. 'टीडीपीएल' जैसी ब्लैकलिस्टेड कंपनियों द्वारा कराई जा रही परीक्षाओं में अभय तिवारी जैसे रसूखदार अधिकारियों का पूरा परिवार (ब्लड रिलेशन) एक साथ 12-12 परीक्षाएं पास कर टॉपर बन रहा है.