चेक बाउंस के सात मामलों में सजा का सामना कर रहे अभिनेता राजपाल यादव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से बताया गया कि 2 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त के तहत 1 करोड़ 15 लाख रुपये की रकम का इंतजाम हो चुका है. वहीं, बाकी 85 लाख रुपये जमा करने के लिए एक जमीन के खरीदार का हवाला दिया गया है.
इस विवाद की शुरुआत करीब 16 साल पहले हुई थी. साल 2010 में राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. फिल्म साल 2012 में रिलीज हुई लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई. फिल्म के फ्लॉप होने के बाद राजपाल यादव के लिए कर्ज की रकम वापस करना मुश्किल हो गया. समय बीतने के साथ ब्याज और अन्य रकम जुड़ती गई और यह विवाद करीब 9 करोड़ रुपए तक पहुंच गया.