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यूपी में भू माफियाओं की चालाकी पर चला हाईकोर्ट को हथौड़ा, अब नहीं हो पाएगी सरकारी जमीन की अदला बलदी!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा की बेशकीमती जमीनों के एक्सचेंज को चुनौती देने वाली जनहित याचिका स्वीकार कर ली है. कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है और कहा है कि सभी भूमि एक्सचेंज अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे.

यूपी में भू माफियाओं की चालाकी पर चला हाईकोर्ट को हथौड़ा, अब नहीं हो पाएगी सरकारी जमीन की अदला बलदी!
यूपी में अब मुश्किल होगी ग्राम सभा की जमीन की अदलाबदली!
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 Allahabad High Court on Gram Sabha Land Exchange: उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा की बेशकीमती जमीनों की अदला बदली करना अब काफी मुश्किल हो गया है. दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी राजस्व कोड की धारा 101 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार और महाधिवक्ता को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है. साथ ही, अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि इस दौरान होने वाले सभी भूमि एक्सचेंज कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा की जमीनों के ट्रांसफर और विनिमय से जुड़े मामलों पर बेहद सख्त रुख अपनाया है. हाईकोर्ट के अधिवक्ता चंद्रशेखर अग्निहोत्री की ओर से दायर इस जनहित याचिका में यूपी राजस्व संहिता की संशोधित धारा 101 की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार यादव ने अदालत के सामने कई गंभीर दलीलें पेश कीं, जिसके बाद कोर्ट ने इसे बहुत ही संवेदनशील मामला मानते हुए यह कड़ा कदम उठाया है.

याचिकाकर्ता के मुख्य आरोप और गंभीर चिंताएं

कोर्ट में रखी गई दलीलों के मुताबिक, इस कानूनी प्रावधान के दुरुपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंच रहा है. दरअसल, यूपी राजस्व संहिता की संशोधित धारा 101 की आड़ में ग्राम सभा की उन जमीनों पर आंच आ रही है, जिन्हें राजस्व संहिता की धारा 77 के तहत सुरक्षित भूमि जैसे तालाब, चरागाह, श्मशान या कब्रिस्तान और सार्वजनिक रास्ते घोषित किए गए हैं. इसे संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है.

याचिका में मुख्य रूप से आरोप लगाया गया है कि भूमाफिया इस कानूनी प्रावधान की आड़ में गांवों की बेहद कीमती और प्राइम लोकेशन वाली सरकारी जमीन हथिया रहे हैं और उसके बदले अपनी किसी दूरदराज या कम कीमत वाली बंजर या निजी जमीन का एक्सचेंज करा लेते हैं. इस याचिका में कोर्ट को यह भी बताया गया कि इस पूरे खेल में स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ होती है, जिससे गांवों की मूल संरचना और भविष्य के विकास की रूपरेखा पूरी तरह तबाह हो रही है.

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हाईकोर्ट के फैसले के अधीन होंगे सभी एक्सचेंज

मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है. इस संबंध में प्रदेश के महाधिवक्ता को भी नोटिस जारी किया गया है. इसके साथ ही कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में यह साफ कर दिया है कि जब तक इस जनहित याचिका पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक अगर प्रदेश में ग्राम सभा की किसी भी जमीन की अदला बदली की जाती है, तो वह इस याचिका के निर्णय के पूरी तरह अधीन रहेगा. इस आदेश के बाद से जमीनों के अदला बदली से जुड़े प्रशासनिक फैसलों पर कानूनी तलवार लटक गई है. 

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