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Ayodhya Case : निर्मोही अखाड़ा भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, रिव्यू पिटीशन में केंद्र पर सवाल
- Wednesday December 11, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ निर्मोही अखाड़े ने भी रिव्यू पिटीशन दाखिल कर दी है. अयोध्या मामले में निर्मोही अखाड़ा भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. अखाड़े ने फैसले के मुताबिक ट्रस्ट में उसका स्थान अब तक केंद्र सरकार द्वारा स्पष्ट न किए जाने का मुद्दा उठाया है.
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अयोध्या पर फैसला : मुस्लिम पक्ष आखिर कौन सी बात साबित नहीं कर पाया सुप्रीम कोर्ट में
- Saturday November 9, 2019
- Reported by: भाषा, Edited by: मानस मिश्रा
सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति के फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया और केन्द्र को निर्देश दिया कि मस्जिद निर्माण के लिये सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ का भूखंड आबंटित किया जाए. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील 134 साल से भी अधिक पुराने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया.
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Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया, विवादित जमीन पर जताया था मालिकाना हक
- Saturday November 9, 2019
- Written by: आनंद नायक
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा को जमीन देने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला गलत था. गौरतलब है कि निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी लिखित दलील में कहा था कि विवादित भूमि का आंतरिक और बाहरी अहाता भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में मान्य है. हम रामलला के सेवायत हैं. यह हमारे अधिकार में सदियों से रहा है. ऐसे में हमें ही रामलला के मंदिर के पुनर्निर्माण, रखरखाव और सेवा का अधिकार मिलना चाहिए.
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Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या केस में क्यों खारिज कर दी निर्मोही अखाड़ा दलील
- Saturday November 9, 2019
- Written by: मानस मिश्रा
अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक पक्ष निर्मोही अखाड़े के जमीन पर मालिकाना हक के दावे को खारिज कर दिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मंदिर के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधि भी होना चाहिए. अखाड़े की ओर से दलील दी गई कि विवादित भूमि के अंदरुनी और बाहरी अहाता ही भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में मान्य है.
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Ayodhya Case: निर्मोही अखाड़े ने भी सुप्रीम कोर्ट में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ के लिए नोट दाखिल किया, कही यह बात...
- Saturday October 19, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: Samarjeet Singh
बता दें कि इस पूरे विवाद के बीच रामलला विराजमान की ओर से भी लिखित जवाब दाखिल किया गया है. रामलला ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सारा क्षेत्र राम मंदिर के लिए उसे दिया जाए. साथ ही निर्मोही अखाड़ा या मुस्लिम पार्टियों को जमीन का कोई हिस्सा नहीं मिलना चाहिए. उधर, राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने भी सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. समिति ने कहा कि विवादित जमीन पर मंदिर ही बने.
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Ayodhya Case : सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की मियाद घटाई, अब सिर्फ चार दिन और होगी बहस
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने शुक्रवार को अयोध्या केस (Ayodhya Case) में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के मामले की 37 वें दिन की सुनवाई करते हुए कहा कि 17 अक्टूबर तक इस मामले की सुनवाई पूरी होगी. उन्होंने अयोध्या के इस मामले से संबंधित ने सभी पक्षों से कहा कि 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करें. पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी पक्षों को 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने के लिए कहा था. इस केस में 14 अक्टूबर को मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन बहस जारी रखेंगे. बाकी सब पक्षकार 15-16 को दलीलें देंगे और 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होगी. यानी अब सिर्फ चार दिन ही सुनवाई होनी है.
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Ayodhya Case : निर्मोही अखाड़े ने कहा- अब सुनवाई 'टी-20' जैसी हो गई, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लताड़
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
अयोध्या केस (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर गुरुवार को 36वें दिन सुनवाई हुई. कोर्ट में निर्मोही अखाड़े की ओर से सुशील जैन ने कहा कि अब यह सुनवाई 20-20 जैसी हो गई है. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपको हमने साढ़े चार दिन दिए. यहां आपको जवाब देना है तो अब आप इसे 20-20 कह रहे हैं? तो क्या आपकी पिछली बहस टेस्ट मैच थी? सुशील जैन ने कहा कि हमारा दावा आंतरिक अहाते को लेकर है, क्योंकि बाहर तो हमारा अधिकार और कब्ज़ा था ही. हमने बाहर के पजेशन के लिए अर्ज़ी नहीं लगाई है क्योंकि वह तो पहले से ही हमारे पास था.
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Ayodhya Case : मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिन्दू सन 1886 में ही मंदिर बनाना चाहते थे
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
अयोध्या केस (Ayodhya Case) में मंगलवार को 30 वें दिन की सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर निरंतर सुनवाई हो रही है. मुस्लिम पक्ष की ओर से उसके वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हिन्दू 1886 केफैसले में पूजा का अधिकार मिलने के बाद विवादित स्थल पर बने चबूतरे पर ही मंदिर बनाना चाहते थे. पर तब के जिला कोर्ट ने इसकी इजाज़त नहीं दी थी. मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में स्वीकार किया कि राम चबूतरे पर भगवान राम का जन्म हुआ था. उन्होंने कहा कि बाद में गुंबद वाले स्थान पर भी हिंदू दावा करने लगे. मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने आज अपनी दलीलें पूरी कर लीं.
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Ayodhya Case : ज्यूरिस्टिक पर्सन के सवाल पर वकील ने कहा, 18-20 पीएचडी करनी पड़ेंगी
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले (Ayodhya Case) में सोमवार को 29 वें दिन की सुनवाई हुई. कोर्ट (जस्टिस बोबड़े) ने पूछा कि अब तक कितने तरह के ज्यूरिस्टिक पर्सन को मान्यता मिली है. क्या उनकी सूची आप पेश कर सकते हैं? इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि इसके लिए तो मुझे 18-20 पीएचडी करनी पड़ेंगी. उन्होंने कहा कि वैसे धर्मशास्त्र ने दो तरह के लोगों को ज्यूरिस्टिक पर्सन माना है. एक तो वे जिनको मानते हैं, और दूसरे जो खुद को ज्यूरिस्टिक पर्सन बना लेते हैं. कोर्ट तीसरे तरह की चीज़ को ज्यूरिस्टिक पर्सन बनाने पर सवाल कर रहा है, जो न तो खुद से है, न ही लोगों ने बनाया. अब आप इलाहाबाद के किले से चारों ओर के इलाके को ज्यूरिस्टिक पर्सन मान लें, जहां हनुमान और संगम है, तो ये कोई नए तरह के देवता हो जाएंगे.
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CJI रंजन गोगोई को उम्मीद- 17 नवंबर तक तय हो जाएगा अयोध्या में राम मंदिर बनेगा या नहीं
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अल्केश कुशवाहा
इस केस की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद भी जताई. 27 सितंबर तक मुस्लिम पक्षकार अपनी बहस पूरी कर लेंगे. मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से राजीव धवन ने कहा, ''अगले हफ़्ते तक हम अपनी बहस पूरी कर लेंगे.''
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Ayodhya Case : निर्मोही अखाड़ा भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, रिव्यू पिटीशन में केंद्र पर सवाल
- Wednesday December 11, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ निर्मोही अखाड़े ने भी रिव्यू पिटीशन दाखिल कर दी है. अयोध्या मामले में निर्मोही अखाड़ा भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. अखाड़े ने फैसले के मुताबिक ट्रस्ट में उसका स्थान अब तक केंद्र सरकार द्वारा स्पष्ट न किए जाने का मुद्दा उठाया है.
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अयोध्या पर फैसला : मुस्लिम पक्ष आखिर कौन सी बात साबित नहीं कर पाया सुप्रीम कोर्ट में
- Saturday November 9, 2019
- Reported by: भाषा, Edited by: मानस मिश्रा
सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति के फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया और केन्द्र को निर्देश दिया कि मस्जिद निर्माण के लिये सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ का भूखंड आबंटित किया जाए. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील 134 साल से भी अधिक पुराने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया.
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Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया, विवादित जमीन पर जताया था मालिकाना हक
- Saturday November 9, 2019
- Written by: आनंद नायक
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा को जमीन देने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला गलत था. गौरतलब है कि निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी लिखित दलील में कहा था कि विवादित भूमि का आंतरिक और बाहरी अहाता भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में मान्य है. हम रामलला के सेवायत हैं. यह हमारे अधिकार में सदियों से रहा है. ऐसे में हमें ही रामलला के मंदिर के पुनर्निर्माण, रखरखाव और सेवा का अधिकार मिलना चाहिए.
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Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या केस में क्यों खारिज कर दी निर्मोही अखाड़ा दलील
- Saturday November 9, 2019
- Written by: मानस मिश्रा
अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक पक्ष निर्मोही अखाड़े के जमीन पर मालिकाना हक के दावे को खारिज कर दिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मंदिर के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधि भी होना चाहिए. अखाड़े की ओर से दलील दी गई कि विवादित भूमि के अंदरुनी और बाहरी अहाता ही भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में मान्य है.
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Ayodhya Case: निर्मोही अखाड़े ने भी सुप्रीम कोर्ट में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ के लिए नोट दाखिल किया, कही यह बात...
- Saturday October 19, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: Samarjeet Singh
बता दें कि इस पूरे विवाद के बीच रामलला विराजमान की ओर से भी लिखित जवाब दाखिल किया गया है. रामलला ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सारा क्षेत्र राम मंदिर के लिए उसे दिया जाए. साथ ही निर्मोही अखाड़ा या मुस्लिम पार्टियों को जमीन का कोई हिस्सा नहीं मिलना चाहिए. उधर, राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने भी सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. समिति ने कहा कि विवादित जमीन पर मंदिर ही बने.
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Ayodhya Case : सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की मियाद घटाई, अब सिर्फ चार दिन और होगी बहस
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने शुक्रवार को अयोध्या केस (Ayodhya Case) में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के मामले की 37 वें दिन की सुनवाई करते हुए कहा कि 17 अक्टूबर तक इस मामले की सुनवाई पूरी होगी. उन्होंने अयोध्या के इस मामले से संबंधित ने सभी पक्षों से कहा कि 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करें. पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी पक्षों को 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने के लिए कहा था. इस केस में 14 अक्टूबर को मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन बहस जारी रखेंगे. बाकी सब पक्षकार 15-16 को दलीलें देंगे और 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होगी. यानी अब सिर्फ चार दिन ही सुनवाई होनी है.
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Ayodhya Case : निर्मोही अखाड़े ने कहा- अब सुनवाई 'टी-20' जैसी हो गई, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लताड़
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
अयोध्या केस (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर गुरुवार को 36वें दिन सुनवाई हुई. कोर्ट में निर्मोही अखाड़े की ओर से सुशील जैन ने कहा कि अब यह सुनवाई 20-20 जैसी हो गई है. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपको हमने साढ़े चार दिन दिए. यहां आपको जवाब देना है तो अब आप इसे 20-20 कह रहे हैं? तो क्या आपकी पिछली बहस टेस्ट मैच थी? सुशील जैन ने कहा कि हमारा दावा आंतरिक अहाते को लेकर है, क्योंकि बाहर तो हमारा अधिकार और कब्ज़ा था ही. हमने बाहर के पजेशन के लिए अर्ज़ी नहीं लगाई है क्योंकि वह तो पहले से ही हमारे पास था.
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Ayodhya Case : मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिन्दू सन 1886 में ही मंदिर बनाना चाहते थे
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
अयोध्या केस (Ayodhya Case) में मंगलवार को 30 वें दिन की सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर निरंतर सुनवाई हो रही है. मुस्लिम पक्ष की ओर से उसके वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हिन्दू 1886 केफैसले में पूजा का अधिकार मिलने के बाद विवादित स्थल पर बने चबूतरे पर ही मंदिर बनाना चाहते थे. पर तब के जिला कोर्ट ने इसकी इजाज़त नहीं दी थी. मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में स्वीकार किया कि राम चबूतरे पर भगवान राम का जन्म हुआ था. उन्होंने कहा कि बाद में गुंबद वाले स्थान पर भी हिंदू दावा करने लगे. मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने आज अपनी दलीलें पूरी कर लीं.
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Ayodhya Case : ज्यूरिस्टिक पर्सन के सवाल पर वकील ने कहा, 18-20 पीएचडी करनी पड़ेंगी
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले (Ayodhya Case) में सोमवार को 29 वें दिन की सुनवाई हुई. कोर्ट (जस्टिस बोबड़े) ने पूछा कि अब तक कितने तरह के ज्यूरिस्टिक पर्सन को मान्यता मिली है. क्या उनकी सूची आप पेश कर सकते हैं? इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि इसके लिए तो मुझे 18-20 पीएचडी करनी पड़ेंगी. उन्होंने कहा कि वैसे धर्मशास्त्र ने दो तरह के लोगों को ज्यूरिस्टिक पर्सन माना है. एक तो वे जिनको मानते हैं, और दूसरे जो खुद को ज्यूरिस्टिक पर्सन बना लेते हैं. कोर्ट तीसरे तरह की चीज़ को ज्यूरिस्टिक पर्सन बनाने पर सवाल कर रहा है, जो न तो खुद से है, न ही लोगों ने बनाया. अब आप इलाहाबाद के किले से चारों ओर के इलाके को ज्यूरिस्टिक पर्सन मान लें, जहां हनुमान और संगम है, तो ये कोई नए तरह के देवता हो जाएंगे.
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CJI रंजन गोगोई को उम्मीद- 17 नवंबर तक तय हो जाएगा अयोध्या में राम मंदिर बनेगा या नहीं
- Wednesday October 16, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अल्केश कुशवाहा
इस केस की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद भी जताई. 27 सितंबर तक मुस्लिम पक्षकार अपनी बहस पूरी कर लेंगे. मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से राजीव धवन ने कहा, ''अगले हफ़्ते तक हम अपनी बहस पूरी कर लेंगे.''
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