Nature In Indian Culture
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भारत में रहकर विदेशी बच्चों ने सीखी जिंदगी की 5 बड़ी सीख, मां बोली- जो शायद कहीं और संभव नहीं था
- Friday April 17, 2026
- Written by: संज्ञा सिंह
भारत में रह रही एक विदेशी महिला ने बताया कि उसके बच्चों ने यहां रहकर जिंदगी की 5 अनोखी और जरूरी बातें सीखी हैं. मेहमाननवाजी से लेकर हेल्दी लाइफस्टाइल तक, जानिए कैसे भारत ने बदला उनका नजरिया.
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भारत, फ्रांस से भी आगे है... विदेशी महिला बोली- यहां की 3 चीजें दुनिया में कहीं नहीं! पोस्ट वायरल
- Saturday February 7, 2026
- Written by: संज्ञा सिंह
भारत में रह रही फ्रांसीसी महिला ने सोशल मीडिया पर बताया कि यहां की कम्युनिटी भावना, प्राकृतिक विविधता और पारंपरिक कपड़ों की कारीगरी ने उसे सबसे ज्यादा प्रभावित किया. उसकी पोस्ट इंटरनेट पर वायरल हो गई है.
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महुआ की छाया में पलती गोंड चित्रकला
- Saturday March 30, 2024
- अतुला गुप्ता
मार्च-अप्रैल के महीनों में, जब फागुन के फूल बहार में हों, गोंड जनजाति की महिलाएं अक्सर एक पेड़ के नीचे हजारों की संख्या में बिखरे पड़े मनमोहक फूलों को बीनती हुई मिलेंगी. यह पेड़ इनके लिए रोजगार का साधन भी है, आराधना योग्य भगवान भी और सांस्कृतिक धरोहर भी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी इनके जीवन को सजाती और संवारती चली आ रही है. यह विशेष वृक्ष है महुआ, जिसे गोंड आदिवासी “Elixir of Life” या जीवनदायिनी मानते हैं.
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भारत में रहकर विदेशी बच्चों ने सीखी जिंदगी की 5 बड़ी सीख, मां बोली- जो शायद कहीं और संभव नहीं था
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भारत में रह रही एक विदेशी महिला ने बताया कि उसके बच्चों ने यहां रहकर जिंदगी की 5 अनोखी और जरूरी बातें सीखी हैं. मेहमाननवाजी से लेकर हेल्दी लाइफस्टाइल तक, जानिए कैसे भारत ने बदला उनका नजरिया.
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भारत में रह रही फ्रांसीसी महिला ने सोशल मीडिया पर बताया कि यहां की कम्युनिटी भावना, प्राकृतिक विविधता और पारंपरिक कपड़ों की कारीगरी ने उसे सबसे ज्यादा प्रभावित किया. उसकी पोस्ट इंटरनेट पर वायरल हो गई है.
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महुआ की छाया में पलती गोंड चित्रकला
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- अतुला गुप्ता
मार्च-अप्रैल के महीनों में, जब फागुन के फूल बहार में हों, गोंड जनजाति की महिलाएं अक्सर एक पेड़ के नीचे हजारों की संख्या में बिखरे पड़े मनमोहक फूलों को बीनती हुई मिलेंगी. यह पेड़ इनके लिए रोजगार का साधन भी है, आराधना योग्य भगवान भी और सांस्कृतिक धरोहर भी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी इनके जीवन को सजाती और संवारती चली आ रही है. यह विशेष वृक्ष है महुआ, जिसे गोंड आदिवासी “Elixir of Life” या जीवनदायिनी मानते हैं.
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