Delhi High Court On Divorce
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जब मियां बीवी राजी तो तलाक के लिए एक साल अलग रहने की शर्त नहीं जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
- Wednesday December 17, 2025
- Edited by: समरजीत सिंह
कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 13B(1) की एक साल की अवधि, और धारा 13B(2) के तहत छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि दोनों अलग-अलग हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से माफ किया जा सकता है.
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अगर पति ने साथ में न रहने के हालात पैदा किये तो पत्नी कर सकती है गुजारा भत्ते का दावा : दिल्ली हाईकोर्ट
- Wednesday September 28, 2022
- Reported by: प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, Edited by: पंकज सोनी
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा, अगर साक्ष्यों से पता चलता है कि पति के आचरण के कारण पत्नी उसके साथ रहने में सक्षम नहीं है और पति ने पत्नी और बच्चों की परवरिश से इनकार कर दिया है, तो पत्नी को गुजारा-भत्ते देने से इनकार नहीं किया जा सकता.
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"तलाकशुदा बहन की कठिनाइयां भाई चुपचाप नहीं देख सकता"- पति पर आश्रिता को लेकर पत्नी की याचिका पर बोला कोर्ट
- Thursday June 9, 2022
- Reported by: भाषा
अदालत ने कहा कि भाई और बहन के रिश्ते में एक-दूसरे का ख्याल रखने की गहरी भावना होती है. भारत के त्योहार, नियम और परंपराएं एक दूसरे का ख्याल रखने, स्नेह करने और एक-दूसरी की जिम्मेदारी लेने को बढ़ावा देते हैं.
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बेटा बालिग हो जाए, तो भी पिता का कर्तव्य खत्म नहीं होता : दिल्ली हाईकोर्ट
- Wednesday June 23, 2021
- Reported by: भाषा
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक तलाकशुदा महिला के लिये उसके वयस्क बेटे के ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी करने या कमाना शुरू करने तक 15 हजार रुपये का अंतरिम गुजारा भत्ता दिए जाने का आदेश देते हुए कहा कि बेटे के 18 वर्ष का होने पर उसके प्रति पिता का कर्तव्य खत्म नहीं होगा और उसकी शिक्षा व अन्य खर्चों का बोझ सिर्फ मां पर नहीं डाला जा सकता है.
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जब मियां बीवी राजी तो तलाक के लिए एक साल अलग रहने की शर्त नहीं जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
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कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 13B(1) की एक साल की अवधि, और धारा 13B(2) के तहत छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि दोनों अलग-अलग हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से माफ किया जा सकता है.
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अगर पति ने साथ में न रहने के हालात पैदा किये तो पत्नी कर सकती है गुजारा भत्ते का दावा : दिल्ली हाईकोर्ट
- Wednesday September 28, 2022
- Reported by: प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, Edited by: पंकज सोनी
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा, अगर साक्ष्यों से पता चलता है कि पति के आचरण के कारण पत्नी उसके साथ रहने में सक्षम नहीं है और पति ने पत्नी और बच्चों की परवरिश से इनकार कर दिया है, तो पत्नी को गुजारा-भत्ते देने से इनकार नहीं किया जा सकता.
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अदालत ने कहा कि भाई और बहन के रिश्ते में एक-दूसरे का ख्याल रखने की गहरी भावना होती है. भारत के त्योहार, नियम और परंपराएं एक दूसरे का ख्याल रखने, स्नेह करने और एक-दूसरी की जिम्मेदारी लेने को बढ़ावा देते हैं.
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बेटा बालिग हो जाए, तो भी पिता का कर्तव्य खत्म नहीं होता : दिल्ली हाईकोर्ट
- Wednesday June 23, 2021
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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक तलाकशुदा महिला के लिये उसके वयस्क बेटे के ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी करने या कमाना शुरू करने तक 15 हजार रुपये का अंतरिम गुजारा भत्ता दिए जाने का आदेश देते हुए कहा कि बेटे के 18 वर्ष का होने पर उसके प्रति पिता का कर्तव्य खत्म नहीं होगा और उसकी शिक्षा व अन्य खर्चों का बोझ सिर्फ मां पर नहीं डाला जा सकता है.
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