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देश में लड़ाकू विमान राफेल आएंगे लेकिन खुले आसमान के नीचे खड़े रहेंगे, क्योंकि...
- Monday February 24, 2020
- Reported by: अनुराग द्वारी, Edited by: सूर्यकांत पाठक
एमईएस में काम करने वाले ठेकेदारों को दो साल से पैसों की कमी से जूझना पड़ रहा है. यह दावा है कि एमईएस बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया का. एसोसिएशन के सदस्यों का दावा है कि उनके लगभग दो हजार करोड़ का भुगतान अटका हुआ है. हालात ये है कि राफेल आने को तैयार है लेकिन उनके लिए हैंगर बनाने को पैसा नहीं है. नतीजतन करोड़ों के राफेल खुले में पड़े रहेंगे.
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ndtv.in
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घर के नक्शे के साथ छेड़छाड़ की तो ग्राउंड फ्लोर पर होगा सरकार का कब्जा
- Wednesday March 29, 2017
- Reported by: नेहाल किदवई, Edited by: सूर्यकांत पाठक
बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका चाहती है कि जो लोग बहुमंजिला इमारत बनाना चाहते हैं वे बिल्डिंग बायलॉज़ का पूरी तरह ख्याल रखें.अगर किसी ने कानून तोड़ने की हिमाकत की तो खामियाजा भुगतना पड़ेगा. बीबीएमपी के कमिश्नर मंजुनाथ प्रसाद ने सफाई दी कि नए कानून के तहत इमारत बन जाने पर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेते वक्त यह जांच की जाएगी कि इमारत एप्रूव्ड नक्शे के तहत बनाई गई है या नहीं.
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एमईएस में काम करने वाले ठेकेदारों को दो साल से पैसों की कमी से जूझना पड़ रहा है. यह दावा है कि एमईएस बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया का. एसोसिएशन के सदस्यों का दावा है कि उनके लगभग दो हजार करोड़ का भुगतान अटका हुआ है. हालात ये है कि राफेल आने को तैयार है लेकिन उनके लिए हैंगर बनाने को पैसा नहीं है. नतीजतन करोड़ों के राफेल खुले में पड़े रहेंगे.
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- Wednesday March 29, 2017
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बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका चाहती है कि जो लोग बहुमंजिला इमारत बनाना चाहते हैं वे बिल्डिंग बायलॉज़ का पूरी तरह ख्याल रखें.अगर किसी ने कानून तोड़ने की हिमाकत की तो खामियाजा भुगतना पड़ेगा. बीबीएमपी के कमिश्नर मंजुनाथ प्रसाद ने सफाई दी कि नए कानून के तहत इमारत बन जाने पर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेते वक्त यह जांच की जाएगी कि इमारत एप्रूव्ड नक्शे के तहत बनाई गई है या नहीं.
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