Bone Marrow Transplant
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50 टन शकरकंद से लड़ी जा रही है कैंसर की जंग, ट्रेन में मिला फरिश्ता
- Wednesday January 7, 2026
- Written by: शालिनी सेंगर
कभी-कभी जिंदगी सबसे मुश्किल मोड़ पर होती है और तभी कोई अनजान फरिश्ता रौशनी की किरण बनकर सामने आ जाता है. चीन की ये कहानी सिर्फ मदद की नहीं, बल्कि इंसानियत की जिंदा मिसाल है.
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एक साल की बच्ची ने अस्थिमज्जा दान करके बचाई 6 साल के भाई की जान
- Saturday October 17, 2020
- Reported by: भाषा
थैलेसेमिया (Thalassemia) से पीड़ित अपने भाई को अस्थिमज्जा दे कर उसकी जान बचाने के लक्ष्य से आईवीएफ की मदद से जन्मी एक साल की बच्ची अपने छह साल के भाई की जान बचाने में कामयाब रही . काव्या नाम की इस बच्ची का जन्म साल भर पहले अहमदाबाद में ‘इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (आईवीएफ) की मदद से ‘रक्षक सहोदर’ अवधारणा के तहत हुआ.
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4 साल के बच्चे को डोनेट किया था बोन मैरो, अब हंसता-खेलता देखा तो भर आई आंखें
- Saturday May 23, 2020
- Reported by: माया शर्मा, Edited by: नवीन कुमार
"विहान को छह महीने की उम्र में थैलेसीमिया नामक बीमारी का पता चला था. इस बीमारी में ऐसा क्या होता है कि पीड़ित अपना खून नहीं बनाते हैं. इसलिए उन्हें जीवन को बनाए रखने के लिए हर कुछ हफ्तों में बाहर से रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) करना पड़ता है, वो भी जीवन भर. लेकिन यह क्या रक्त करता है इसके साथ अपनी जटिलताओं को लाता है और दुर्भाग्य से इनमें से अधिकांश बच्चे जीवन के दूसरे या तीसरे दशक से अधिक नहीं बचते हैं. तो इसका एकमात्र इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन है और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के लिए हमें किसी को उनके लिए दान करने की आवश्यकता होती है. एक स्वस्थ दाता होना चाहिए जो दान कर सकता है.”
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14 साल का बच्चा ब्लड कैंसर से और माता-पिता पैसे की कमी से जूझ रहे हैं
- Monday June 6, 2016
- J Sam Daniel Stalin
चंद्रप्रकाश इंजीनियर बनना चाहता है लेकिन 14 साल का यह बच्चा घर से ज्यादा वक्त अस्पताल में बिताता है क्योंकि उसे 'ब्लड कैंसर' है। डॉक्टर कहते है कि उसकी जान बचाई जा सकती है लेकिन उसके माता पिता इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
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गंभीर बीमारी से जूझ रही है बेबी आरिशा, मदद का इंतजार
- Tuesday November 4, 2014
- Reported by: मुकेश सिंह सेंगर, Edited by: राजीव मिश्र
खेलती कूदती और चहकती आरिशा के लिए जिंदगी इतनी आसान नहीं। करीब दो साल की इस बच्ची को रेड सेल एप्लेशिया नाम की गंभीर बीमारी है जिसका असर भी अब दिखने लगा है। अगले कुछ महीनों में एक बड़ी सर्जरी की जरूरत है जिसके लिए मदद की उम्मीद लिये घरवाले उड़ीसा से दिल्ली आए हैं।
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- Saturday October 17, 2020
- Reported by: भाषा
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- Saturday May 23, 2020
- Reported by: माया शर्मा, Edited by: नवीन कुमार
"विहान को छह महीने की उम्र में थैलेसीमिया नामक बीमारी का पता चला था. इस बीमारी में ऐसा क्या होता है कि पीड़ित अपना खून नहीं बनाते हैं. इसलिए उन्हें जीवन को बनाए रखने के लिए हर कुछ हफ्तों में बाहर से रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) करना पड़ता है, वो भी जीवन भर. लेकिन यह क्या रक्त करता है इसके साथ अपनी जटिलताओं को लाता है और दुर्भाग्य से इनमें से अधिकांश बच्चे जीवन के दूसरे या तीसरे दशक से अधिक नहीं बचते हैं. तो इसका एकमात्र इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन है और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के लिए हमें किसी को उनके लिए दान करने की आवश्यकता होती है. एक स्वस्थ दाता होना चाहिए जो दान कर सकता है.”
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- Monday June 6, 2016
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चंद्रप्रकाश इंजीनियर बनना चाहता है लेकिन 14 साल का यह बच्चा घर से ज्यादा वक्त अस्पताल में बिताता है क्योंकि उसे 'ब्लड कैंसर' है। डॉक्टर कहते है कि उसकी जान बचाई जा सकती है लेकिन उसके माता पिता इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
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खेलती कूदती और चहकती आरिशा के लिए जिंदगी इतनी आसान नहीं। करीब दो साल की इस बच्ची को रेड सेल एप्लेशिया नाम की गंभीर बीमारी है जिसका असर भी अब दिखने लगा है। अगले कुछ महीनों में एक बड़ी सर्जरी की जरूरत है जिसके लिए मदद की उम्मीद लिये घरवाले उड़ीसा से दिल्ली आए हैं।
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