भारतीय टीवी इंडस्ट्री में कई ऐसे सीरियल्स बने हैं, जिन्होंने सालों तक दर्शकों का मनोरंजन किया है. इन सीरियल्स का खास बात ये है कि इन्हें लंबे समय तक देखते हुए लोग खुद को इनकी कहानी से कनेक्ट करने लगते हैं. ऐसे ही एक मशहूर सीरियल के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं. इस मशहूर सीरियल का नाम 'नीम का पेड़' है. दूरदर्शन पर आने वाला ये सीरियल दर्शकों के बीच काफी ज्यादा फेमस हुआ था. 'नीम का पेड़ ' धारावाहिक साल 1991 में डीडी लखनऊ चैनल पर शुरू हुआ था और 1994 तक चला. तो आइए जानते इस नाटक के बारे में.
आपको बता दें कि 'नीम का पेड़', इसी नाम से लिखे गए लेखक डॉ. राही मासूम राजा के उपन्यास पर आधारित था. इसका डायरेक्शन गुरबीर सिंह ग्रेवाल ने किया था. इसके प्रोड्यूसर नवमान मलिक थे. वहीं, इस सीरियल के बोल दिग्गज शायर-कवि और गीतकार निदा फाजली ने लिखे थे.
'नीम का पेड़' की स्टार कास्ट
साल 1991 में आया 'नीम का पेड़' उस समय के सबसे चर्चित टीवी सीरियलों में से एक था. इसकी शुरुआत डीडी लखनऊ से हुई थी और बाद में इसे दूरदर्शन के नेशनल नेटवर्क पर भी दिखाया गया. इस सीरियल में पंकज कपूर ने मुख्य किरदार बुधई राम निभाया था. उनके साथ अरुण बाली, एस.एम. जहीर, विजय मिश्रा, प्रीति खरे, सुरेंद्र शर्मा और साक्षी तंवर जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे.
सीरियल की कहानी एक गांव की सामाजिक व्यवस्था, जमींदारी प्रथा और बंधुआ मजदूर बुधई राम के संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी दमदार कहानी और अवधी भाषा में लिखे गए संवाद थे जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया. यही वजह थी कि 'नीम का पेड़' अपने समय के यादगार टीवी सीरियल में शामिल हो गया.
क्या थी 'नीम का पेड़' की कहानी
इस सीरियल में पंकज कपूर ने बंधुआ मजदूर बुधई राम का किरदार निभाया था. उनकी शानदार एक्टिंग ने इस किरदार को हमेशा के लिए अमर बना दिया. कहानी एक ऐसे गांव की थी, जहां जमींदारी व्यवस्था, सामाजिक असमानता और गरीबों के संघर्ष को बेहद इमोशनल तरीके से दिखाया गया था. कहानी का मुख्य किरदार बुधई (पंकज कपूर) एक भूमिहीन मजदूर है, जो अपने जमींदार जमीन मियां (अरुण बाली) का बेहद वफादार होता है. बुधई की सबसे बड़ी इच्छा होती है कि उसका इकलौता बेटा सुखी राम पढ़-लिखकर बंधुआ मजदूरी की जिंदगी से बाहर निकले और सम्मान के साथ अपना भविष्य बनाए.
समय के साथ कहानी नया मोड़ लेती है. जमींदार की किस्मत बदलने लगती है और उसका चचेरा भाई चालाकी से उसे एक नेता की हत्या के आरोप में फंसा कर जेल भिजवा देता है. दूसरी ओर, आजाद भारत में बुधई का बेटा सुखी राम मेहनत के दम पर राजनीति में आगे बढ़ता है और सांसद (एमपी) बन जाता है. समस्या यह होती है कि जमींदार का बेटा, सुखी राम का करीबी सहयोगी बनकर उसके साथ काम करने लगता है.
सत्ता मिलने के बाद सुखी राम अपने पिता के आदर्शों और ईमानदारी से भटक जाता है. धीरे-धीरे वह भ्रष्टाचार और स्वार्थ की राजनीति में फंसता चला जाता है. मजदूर का बेटा ऊंचे पद तक तो पहुंच जाता है लेकिन अपने पिता के संस्कारों को नहीं बचा पाता. अंत में सही सब चीजें उसे पूरी तरह से बर्बाद कर देती हैं.
जगजीत सिंह की आवाज ने बनाया सीरियल को फेमस
'नीम का पेड़' की कहानी जितनी पावरफुल थी, इसकी म्यूजिक भी उतना ही ज्यादा यादगार साबित हुआ. सीरियल के हिट होने की एक वजह इसका म्यूजिक भी था. मशहूर गायक जगजीत सिंह की आवाज में गाया गया गीत "मुंह की बात सुने हर कोई..." उस समय घर-घर में बजता था. ये गीत सिर्फ एक धुन नहीं, बल्कि पूरे सीरियल की भावना को बयां करता था.
क्यों रखा गया 'नीम का पेड़' नाम?
सीरियल का नाम भी कहानी से जुड़ा हुआ था. कहानी के अनुसार, बुधई राम अपने बेटे के जन्म पर एक नीम का पौधा लगाता है. समय के साथ बेटा भी बड़ा होता है और पेड़ भी, लेकिन समाज की सोच और व्यवस्था में कोई खास बदलाव नहीं आता. यही नीम का पेड़ इस कहानी का सबसे बड़ा प्रतीक बन जाता है. 'नीम का पेड़' की शूटिंग उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के एक गांव में की गई थी. ये सीरियल फेमस होने बाद इस गांव में भी लोग काफी ज्यादा जाने लगे थे. आपको बता दें कि यह सीरियल प्रसिद्ध उपन्यास
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