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एसडी बर्मन का वो गाना, जिसकी धुन पर बने 6 हिट गाने, लता से किशोर कुमार तक ने दी आवाज, 34 साल तक चलता रहा जादू

मशहूर संगीतकार एसडी बर्मन ने 1951 में एक ऐसी धुन तैयार की, जिसने आने वाले 34 साल तक संगीतकारों को आकर्षित किया. हैरानी की बात यह है कि इसी धुन पर अलग अलग दौर में छह और यादगार गाने बने और लगभग सभी श्रोताओं के बीच जबरदस्त हिट साबित हुए.

एसडी बर्मन का वो गाना, जिसकी धुन पर बने 6 हिट गाने, लता से किशोर कुमार तक ने दी आवाज, 34 साल तक चलता रहा जादू
एसडी बर्मन की इस एक धुन पर बने 7 सुपरहिट गाने

भारतीय सिनेमा में कुछ धुनें ऐसी होती हैं, जिन्हें सुनते ही लगता है कि कहीं पहले भी सुना है. कई बार इसकी वजह प्रेरणा होती है, लेकिन कुछ किस्से इससे भी ज्यादा दिलचस्प होते हैं. मशहूर संगीतकार एसडी बर्मन ने 1951 में एक ऐसी धुन तैयार की, जिसने आने वाले 34 साल तक संगीतकारों को आकर्षित किया. हैरानी की बात यह है कि इसी धुन पर अलग अलग दौर में छह और यादगार गाने बने और लगभग सभी श्रोताओं के बीच जबरदस्त हिट साबित हुए. अगर आपको पुराने फिल्मी गाने पसंद हैं, तो यह कहानी आपको जरूर चौंकाएगी.

1951 में शुरू हुई यादगार धुन की कहानी

सचिन देव बर्मन, जिन्हें पूरी फिल्म इंडस्ट्री प्यार से एसडी बर्मन या बर्मन दा कहती थी, भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े संगीतकारों में गिने जाते हैं. उन्होंने 1951 में फिल्म 'नौजवां' के लिए 'ठंडी हवाएं.. लहरा के आएं..' गाना तैयार किया. लता मंगेशकर की आवाज में यह गीत उस दौर का बड़ा हिट बना और इसकी धुन लोगों के दिलों में बस गई.

फिर इसी धुन पर बनते गए नए गाने

इस धुन की सबसे खास बात यह रही कि बाद के वर्षों में कई संगीतकारों ने इसी सुरों की बुनियाद पर नए गीत तैयार किए. समय बदला, फिल्में बदलीं, गायक बदले, लेकिन धुन की खूबसूरती बरकरार रही.

1954: तेरा दिल कहां है

फिल्म 'चांदनी चौक' के इस गीत को रोशन ने संगीत दिया. आशा भोसले की आवाज में यह रोमांटिक गीत भी खूब पसंद किया गया.

1964: यही है तमन्ना

फिल्म 'आप की परछाइयां' के लिए मदन मोहन ने इसी धुन से प्रेरित यह गीत तैयार किया. मोहम्मद रफी की आवाज और धर्मेंद्र पर फिल्मांकन ने इसे खास बना दिया.

1966: रहें ना रहें हम

फिल्म 'ममता' का यह गीत आज भी सदाबहार गानों में गिना जाता है. संगीत रोशन का था और इसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी.

1981: हमें रास्तों की

फिल्म 'नरम गरम' में आर डी बर्मन ने इसी धुन को नए अंदाज में पेश किया. आशा भोसले की आवाज और गुलजार के बोलों ने इसे अलग पहचान दी.

1983: हमें और जीने की चाहत ना होती

फिल्म 'अगर तुम ना होते' का यह गीत किशोर कुमार की आवाज में आज भी खूब सुना जाता है. इसका संगीत भी आरडी बर्मन ने तैयार किया था.

1985: सागर किनारे.. दिल ये पुकारे

फिल्म 'सागर' का यह मशहूर गीत भी उसी धुन की कड़ी माना जाता है. किशोर कुमार और लता मंगेशकर की जोड़ी ने इसे यादगार बना दिया.

फिल्मी संगीत की दुनिया में एक धुन से प्रेरित होकर कई गाने बनने की मिसालें मिलती हैं, लेकिन एक ही धुन का तीन दशक से भी ज्यादा समय तक अलग अलग संगीतकारों के हाथों नए रूप में सामने आना और लगभग हर बार सुपरहिट साबित होना अपने आप में बेहद अनोखी बात है. यही वजह है कि एसडी बर्मन की यह धुन आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे दिलचस्प संगीत किस्सों में शुमार की जाती है.

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