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Doordarshan Ramayan Facts: 40 एकड़ के सेट पर सिर्फ 4 फीट की थी रावण की लंका, पांच साल चली शूटिंग, हर शिफ्ट में खर्च होते थे इतने रुपये

रामानंद सागर की 'रामायण' में दिखने वाला रावण का महल जितना विशाल नजर आता था, असल में उतना था ही नहीं. 40 एकड़ में बने सेट, 4 फीट ऊंचे महल और 2000 रुपए की एक शिफ्ट वाली शूटिंग से जुड़े कई दिलचस्प किस्से फिर चर्चा में हैं.

Doordarshan Ramayan Facts: 40 एकड़ के सेट पर सिर्फ 4 फीट की थी रावण की लंका, पांच साल चली शूटिंग, हर शिफ्ट में खर्च होते थे इतने रुपये
रामानंद सागर की 'रामायण' की दिलचस्प कैमरा ट्रिक! जानकर चौंक जाएंगे आप
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नितेश तिवारी की 'रामायणम्' को लेकर जितनी चर्चा हो रही है, उतनी ही तेजी से लोगों की दिलचस्पी एक बार फिर रामानंद सागर की 'रामायण' में भी बढ़ गई है. सोशल मीडिया पर पुराने किस्से और पर्दे के पीछे की कहानियां फिर वायरल हो रही हैं. इन्हीं में एक ऐसा खुलासा भी है, जिसे जानकर शायद आपको अपनी आंखों पर यकीन न हो. टीवी पर बेहद विशाल और आलीशान दिखने वाला रावण का महल असल में महज करीब 4 फीट ऊंचा बनाया गया था. इतना ही नहीं, जिस स्टूडियो में इस ऐतिहासिक धारावाहिक की शूटिंग हुई, वहां उस दौर में 8 घंटे की एक शिफ्ट का किराया सिर्फ 2000 रुपए हुआ करता था.

सोने की विशाल लंका सिर्फ 4 फीट की

'रामायण' में लंका का महल बनाने से पहले उसकी पूरी रूपरेखा पेंटिंग के जरिए तैयार की जाती थी. सेट कैसा दिखेगा, कौन से रंग इस्तेमाल होंगे और कैमरे पर उसका असर कैसा आएगा, इन सभी बातों पर पहले विस्तार से काम होता था. इसके बाद उसी डिजाइन के आधार पर सेट तैयार किया जाता था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस दृश्य में रावण अपनी महल की बालकनी से कुंभकर्ण से बात करता दिखाई देता है, वहां महल बहुत ऊंचा नजर आता है. लेकिन वास्तविकता में उसकी ऊंचाई करीब 4 फीट थी. कैमरे की तकनीक और खास तरीके से की गई शूटिंग ने उसे पर्दे पर कई गुना बड़ा बना दिया.

अशोक वाटिका भी पहले कागज पर बनी, फिर कैमरे के सामने आई

सिर्फ रावण का महल ही नहीं, अशोक वाटिका को भी पहले पेंटिंग के जरिए डिजाइन किया गया था. डिजाइन पसंद आने के बाद उसे वास्तविक रूप दिया गया. वहां असली पेड़-पौधे लगाए गए, बगीचा तैयार किया गया और माहौल ऐसा बनाया गया कि दर्शकों को वह सचमुच की वाटिका लगे. धारावाहिक में इस्तेमाल होने वाले कपड़े, गहने, हथियार और दूसरे सेट भी पहले चित्रों के रूप में तैयार किए जाते थे.

40 एकड़ में बसा था 'रामायण' का संसार

इस धारावाहिक की शूटिंग गुजरात के उमरगाम स्थित वृंदावन स्टूडियो में हुई थी. यह स्टूडियो करीब 40 एकड़ में फैला हुआ था. समुद्र के किनारे बने इस परिसर में अलग-अलग तरह के सेट तैयार किए गए थे, जिनमें राजमहल, लंका, युद्ध के मैदान, आश्रम और कई दूसरी जगहों को दिखाया गया. यहां तक कि समुद्र वाले कई दृश्य भी स्टूडियो के भीतर ही फिल्माए गए थे.

तब एक शिफ्ट का किराया था सिर्फ 2000 रुपए

'रामायण' की शूटिंग 1985 में शुरू हुई थी और करीब पांच साल तक चली. उस समय स्टूडियो का किराया शिफ्ट के हिसाब से लिया जाता था. 8 घंटे की एक शिफ्ट के लिए 2000 रुपए चुकाने पड़ते थे. कलाकारों और तकनीकी टीम के ठहरने की व्यवस्था अलग से की जाती थी.

आज करोड़ों रुपए खर्च करके बड़े-बड़े विजुअल इफेक्ट्स तैयार किए जाते हैं, लेकिन उस दौर में सिर्फ कैमरे की समझ, शानदार सेट डिजाइन और देसी जुगाड़ के दम पर 'रामायण' ने ऐसा जादू रचा कि आज भी उसके किस्से लोगों को हैरान कर देते हैं. शायद यही वजह है कि नई 'रामायणम्' की चर्चा के बीच भी रामानंद सागर की 'रामायण' से जुड़े ऐसे किस्से आज भी लोगों को उतने ही रोमांचित करते हैं, जितना पहली बार टीवी पर इसे देखने के दौरान करते थे.

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