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This Article is From Nov 13, 2018

चलती ट्रेन की छत काटकर लूटे 5.78 करोड़, लेकिन हो गई नोटबंदी

मिली जानकारी के मुताबिक  एच मोहर सिंह, रूसी पर्दी, महेश पर्दी, कालिया उर्फ कृष्णा और बिल्टिया ने साल 2016 में सलेम-चेन्नई एक्सप्रेस में डाका डालकर 5.78 करोड़ रुपये लूटे थे.

चलती ट्रेन की छत काटकर लूटे 5.78 करोड़, लेकिन हो गई नोटबंदी
आरोपी लूट का रुपया इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं क्योंकि घटना के बाद नोटबंदी हो गई थी.
नई दिल्ली: नोटबंदी को देश की अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हुआ इस पर तो सालों बहस होती रहेगी लेकिन इसी से जुड़ी एक ऐसी घटना सामने आई है जिसे पढ़ने के बाद आप भी हमेशा याद रखेंगे. यह मामला तमिलनाडु में 5.78 करोड़ रुपये की चोरी से जुड़ा हुआ जिसमें शामिल 5 आरोपियों को पुलिस कस्टडी की मियाद खत्म होने के बाद जेल भेज दिया गया है. सीबीसीआईडी से मिली जानकारी के मुताबिक  एच मोहर सिंह, रूसी पर्दी, महेश पर्दी, कालिया उर्फ कृष्णा और बिल्टिया ने साल 2016 में सलेम-चेन्नई एक्सप्रेस में डाका डालकर 5.78 करोड़ रुपये लूटे थे. पुलिस के मुताबिक सरगना मोहर सिंह के साथ ये सभी 2016 में तमिलनाडु आए थे और रेलवे स्टेशनों, ट्रेन ट्रैक और पुलों के नीचे जैसी कई जगहों पर अपना ठिकाना बना रखा था. 

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इस दौरान मोहर सिंह को अपने ही एक साथ से पता चला कि सलेम-चेन्नई एक्सप्रेस ट्रेन से कैश भेज जाता है. इसके बाद कालिया, रूसी, बिल्टिया ने इस ट्रेन के रास्ते पर नजर रखने के लिए एक हफ्ते तक अयोथिपट्टनम और विरुदचलम के बीच हफ्तों इसी ट्रेन से सफर किया. इसके बाद इन सभी ने चिन्नासलम और विरुदचलम स्टेशनों के बीच ट्रेन में डकैती डालने का फैसला किया क्योंकि इस दोनों ही स्टेशनों के बीच ट्रेन बिना रुके 45 मिनट तक दौड़ती है. योजना के मुताबिक मोहर सिंह अपने चार साथियों के साथ चिन्नासलम स्टेशन पर चढ़ जाता है. थोड़ दूर चलने के बाद चारो पार्सल वैन की छत पर पहुंच जाते हैं और उसकी छत पर बैटरी से चलने वाले औजार के जरिए छेद कर देते हैं. 

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इनमें से दो उसी छेद के सहारे नीचे उतरते हैं और वहां रखे लकड़ी के बख्सों को तोड़कर कैश निकालते हैं और छह लुंगियों में भर लेते हैं. वहीं गैंग का एक गुर्गा महेश पर्दी विरुदचलम स्टेशन के पास बने ब्रिज पर पटरियों के किनारे होकर इनका इंतजार कर रहा होता है. ट्रेन के पास पहुंचती ही सभी लुंगियां महेश के पास फेंक दी जाती हैं और सभी मौका देखते ही ट्रेन से कूदकर फरार हो जाते हैं.  पुलिस के मुताबिक पूरा कैश में आपस में बांट लिया जाता है लेकिन इसे इन लुटेरों का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि ये लूट का माल खर्च कर पाते कि तीन महीने बाद नोटबंदी हो जाती है जिसमें 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए जाते हैं. 
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इनपुट : आईएनएस 
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