महाराष्ट्र के मंत्री सुभाष देसाई ने बालासाहब ठाकरे की तुलना महात्मा गांधी से की है.
- सामाजिक कार्यकर्ता भगवान रयानी ने निर्माण के खिलाफ कोर्ट में चुनौती दी
- सरकारी संसाधनों पर होने वाला कब्ज़ा रोकने के लिए जनहित याचिका लगाई
- बालासाहब ठाकरे मेमोरियल के लिए एक रुपये सालाना लीज पर मिली जमीन
मुंबई:
मुंबई में बनने जा रहे शिवसेना के दिवंगत प्रमुख बालासाहब ठाकरे के स्मारक का विवाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है. इससे शिवसेना नेताओं में गुस्सा है. अपने गुस्से का इजहार करते हुए वरिष्ठ शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने बालासाहेब की तुलना महात्मा गांधी से की.
सामाजिक कार्यकर्ता भगवान रयानी शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे मेमोरियल को चुनौती दे चुके हैं. यह उनकी 115वीं जनहित याचिका बताई जा रही है. अपनी याचिका में उन्होंने ठाकरे मेमोरियल के नाम पर सरकारी संसाधन पर होते अतिक्रमण को रोकने की मांग की है. NDTV इंडिया से बातचीत में रयानी ने कहा कि अगर वे इस याचिका में कामयाब होते हैं तो देशभर में इस तरह से सरकारी संसाधनों पर होने वाला कब्ज़ा रोका जा सकेगा और सैकड़ों एकड़ जमीन बच जाएगी.
ठाकरे मेमोरियल के नाम पर मुंबई के मध्यवर्ती शिवाजी पार्क इलाके में समंदर से सटी पौने 3 एकड़ सरकारी जमीन सिर्फ़ एक रुपये सालाना लीज पर 99 साल के लिए पाने में शिवसेना कामयाब हुई है. जमीन का मौजूदा बाज़ार मूल्य करोड़ों में है. यही नहीं, सरकारी तिजोरी से मेमोरियल के नाम पर 100 करोड़ रुपये का खर्च भी मंजूर कराया गया है. बालासाहब ठाकरे के किसी भी संवैधानिक पद पर न होते हुए भी दी जा रही इन रियायतों के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका से शिवसेना नेताओं का पारा चढ़ चुका है.
इस मामले पर शिवसेना के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने मीडिया से पूछा कि महात्मा गांधी कहां किसी संवैधानिक पद पर थे, फिर भी उनके नाम पर अनेक जगहों पर स्मारक बने हुए हैं. तो फिर यह सवाल बालासाहब को लेकर ही क्यों उठाए जा रहे हैं? लेकिन फिर भी इस बाबत जरूरी जवाब राज्य सरकार कोर्ट में देगी.
सामाजिक कार्यकर्ता भगवान रयानी शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे मेमोरियल को चुनौती दे चुके हैं. यह उनकी 115वीं जनहित याचिका बताई जा रही है. अपनी याचिका में उन्होंने ठाकरे मेमोरियल के नाम पर सरकारी संसाधन पर होते अतिक्रमण को रोकने की मांग की है. NDTV इंडिया से बातचीत में रयानी ने कहा कि अगर वे इस याचिका में कामयाब होते हैं तो देशभर में इस तरह से सरकारी संसाधनों पर होने वाला कब्ज़ा रोका जा सकेगा और सैकड़ों एकड़ जमीन बच जाएगी.
ठाकरे मेमोरियल के नाम पर मुंबई के मध्यवर्ती शिवाजी पार्क इलाके में समंदर से सटी पौने 3 एकड़ सरकारी जमीन सिर्फ़ एक रुपये सालाना लीज पर 99 साल के लिए पाने में शिवसेना कामयाब हुई है. जमीन का मौजूदा बाज़ार मूल्य करोड़ों में है. यही नहीं, सरकारी तिजोरी से मेमोरियल के नाम पर 100 करोड़ रुपये का खर्च भी मंजूर कराया गया है. बालासाहब ठाकरे के किसी भी संवैधानिक पद पर न होते हुए भी दी जा रही इन रियायतों के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका से शिवसेना नेताओं का पारा चढ़ चुका है.
इस मामले पर शिवसेना के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने मीडिया से पूछा कि महात्मा गांधी कहां किसी संवैधानिक पद पर थे, फिर भी उनके नाम पर अनेक जगहों पर स्मारक बने हुए हैं. तो फिर यह सवाल बालासाहब को लेकर ही क्यों उठाए जा रहे हैं? लेकिन फिर भी इस बाबत जरूरी जवाब राज्य सरकार कोर्ट में देगी.
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