अगर आपको पहाड़, हरियाली और शांत माहौल पसंद है तो उत्तराखंड का मदमहेश्वर आपकी अगली ट्रिप हो सकती है. रुद्रप्रयाग जिले में स्थित यह जगह पंच केदारों में शामिल है. यहां भगवान शिव के मध्य भाग यानी नाभि की पूजा की जाती है. करीब 3,497 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह मंदिर चौखंभा समेत हिमालय की ऊंची चोटियों के खूबसूरत नजारे देता है. अगर आप परिवार में माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ यहां आते हैं तो आप यहां के खूबसूरत नजारों का आनंद सभी के साथ ले सकते हैं.
दिल्ली से कैसे पहुंचें मदमहेश्वर
अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो परिवार या दोस्तों के साथ सड़क मार्ग से हरिद्वार, ऋषिकेश, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और ऊखीमठ होते हुए रांसी गांव पहुंच सकते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसे रांसी ट्रेक का बेस मााना जाता है. यहां के बाद गाड़ी का रास्ता खत्म हो जाता है और करीब 16-17 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ता है.
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रास्ते में मिलेंगे पहाड़ और गांव
अगर आप पैदल ट्रेक शुरू करते हैं तो आपको रांसी से आगे गोंडार और बंतोली जैसे पहाड़ी गांव रास्ते में आाते हैं. जंगल, झरने, नदी और पहाड़ों के बीच यह ट्रेक अपने आप में यादगार अनुभव देता है. रास्ते में ठहरने और खाने के लिए बेसिक होमस्टे और छोटे ठिकाने भी मिल जाते हैं.
बुढ़ा मदमहेश्वर से दिखता है अद्भुत नजारा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मंदिर से करीब 2 किलोमीटर आगे बुढ़ा मदमहेश्वर है. यहां से चौखंभा, नीलकंठ और दूसरी बर्फ से ढकी चोटियों का शानदाार नजारा दिखाई देता है. वहीं कांचनी ताल एक ऊंचाई वाली ग्लेशियल झील है, जहां पहुंचने के लिए अलग ट्रेक करना पड़ता है.
ट्रेक से पहले मौसम जरूर जांचें
आपकों एक सलाह दें तो आप मदमहेश्वर का ट्रेक आसान समझकर न निकलें. ऊंचाई और मौसम को देखते हुए फिटनेस, गर्म कपड़े, पानी और जरूरी सामान साथ रखें. खासकर मानसून में रास्तों की स्थिति और मौसम की जानकारी स्थानीय प्रशासन या गाइड से लेकर ही यात्रा शुरू करना बेहतर है.
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