जहां 1-2 रुपए लेकर हम स्कूल में ट्रीट कर लेते थे और अपनी पसंदीदा चीजें खा लेते थे. ऐसा ही एक किस्सा है मानसी का, जो कानपुर की गलियों में पली-बढ़ी हैं, मानसी ने बताया कि स्कूल जाने से पहले मम्मी-पापा से 1-2 रुपए लेना और स्कूल छूटने के बाद बाहर खड़े ठेले से चूरन, इमली या खट्टी-मीठी गोलियां लेने पर किसी करोड़पति से कम फील नहीं होता था.
सच में बचपन की ये छोटी-छोटी सी खुशियां भी चेहरे पर एक मुस्कान ले आती हैं. कहां तक 1-2 रुपए में हम अपनी दुनिया जी लेते थे और खुद को किसी से कम नहीं समझते थे.
इमली-चूरन का मजा
मानसी ने बताया कि इमली-चूरन खाने में मजा तो बहुत आता था, लेकिन चूरन के रंग से रंगी हुई जीभ देखकर मां की डांट भी खूब पड़ती थी. मां हमेशा बोलती थी, "इमली-चूरन मकत खाया कर, वरना लंबी नहीं होगी." मानसी की इस बात से आप सब भी रिलेट कर पाएंगे कि आपको भी कभी ना कभी इसके लिए डांट जरूर पड़ी होगी.
उस समय मानसी को लगता था कि मां कि बात सच ना हो जाए, इसलिए हमेशा डर लगता था खाने से. लेकिन इमली वाले ठेले को देखते ही खुद को रोक पाना बहुत मुश्किल होता था. बचपन तो इस उधेड़-बुन में निकल गया. मां की बात सुनकर कुछ दिन रुकी जरूर, लेकिन कुछ दिन बाद फिर से वो सिलसिला शुरू हो गया.
क्या थी असल सच्चाई?
इसी के साथ समय निकला, स्कूल खत्म हुई, कॉलेज आए और फिर नौकरी कर के सेल्फ डिपेंडेंट बन गई. एक दिन ऑफिस में ही दोस्तों के साथ बचपन के खाने की बातें हो रही थी. तभी मेरी एक दोस्त ने बताया कि इमली खाने से लंबाई नहीं बढ़ती है, ये बात उसकी मां ने भी उसको बोली थी. तभी मेरे मन में सवाल उठा कि क्या आखिर सच में इस बात में कोई सच्चाई है, अगर नहीं तो फिर मां इसे खाने से मना क्यों करती थी.
मानसी उस दिन घर पहुंची और सबसे पहले इस बचपन के डर का सच पता लगाने लगीं. वो जितना इसके बारे में जानती, उतना ही हैरान होती. उनको पता लगा कि बचपन से ही वो झूठ ही में डराई जा रही थीं. असल में ऐसा कुछ होता है इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला. लंबाई का बढ़ना आपके जीन, पोषत तत्वों, नींद और फिजिकल एक्टिविटी पर डिपेंड करती हैं.
आखिर मां इमली-चूरन के लिए मना क्यों करती थीं?
इसका जवाब मानसी को मिला जिसके बाद उनको समझ आया कि मां आखिर ऐसा बोलती क्यों थी. दरअसल, चूरन में बहुत सारा नमक, मसालें और कई चीजें मिलाई जाती थीं, इसी के साथ इसकी क्वालिटी पर भी कई सवाल उठ सकते थे. जिसकी एक वजह ये भी थी कि अगर बच्चे ज्यादा मात्रा में चूरन, टॉफियां और खट्टी चीजें खाती हैं, तो उनका पेट जल्दी खराब हो जाता था. जिस वजह से वो सही से खाना नहीं खाता था और उसे पोषक तत्व नहीं मिल पाते.
ज्यादा नमक खाना हमारी सेहत के लिए हानिकारक होता है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मिशन में पब्लिश एक रिसर्च में भी इस बारे में बताया गया है.
तब मानसी को समझ आया कि मां शायद इस बात को अगर ये कह कर समझाती कि इसको खाने से पेट खराब होगा और फिर वो हेल्दी खाना जैसे दूध, दाल, फल और सब्जियां नहीं खा पाएगा. यही वजह थी कि मां इसको खाने से मना करती थीं.
मानसी को तब समझ आया कि ये सिर्फ एक नियम नहीं था, बल्कि अब समझ आया कि उनकी मां ये उनकी सेहत के लिए ही करती थी.
इसके साथ ही ज्यादा खट्टी चीजों का सेवन करने से बच्चों के पेट में जलन, दांतों में परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. शायद इन्हीं परेशानियों से बचने के लिए मां ने ये आसान सा डर बनाया था- 'लंबाई रूक जाएगी.'
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