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मैप पर भरोसा पड़ा भारी, दिल्ली की काजल ने सुनाई अपनी रोड ट्रिप की डरावनी कहानी

दिल्ली की काजल की रोड ट्रिप पहाड़ों में अचानक डरावने अनुभव में बदल गई. जानें कैसे मैप्स के भरोसे लिया गया शॉर्टकट मुसीबत बन गया.

मैप पर भरोसा पड़ा भारी, दिल्ली की काजल ने सुनाई अपनी रोड ट्रिप की डरावनी कहानी
पहाड़ों की मेरी रोड ट्रिप का सच
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भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा ब्रेक लेने के लिए दिल्ली की रहने वाली काजल ने ट्रिप का प्लान बनाया. इस भीड़-भाड़ से बाहर निकलने के लिए उन्होंने सोचा कि क्यों न पहाड़ों पर जाया जाए. एनडीटीवी से बातचीत में काजल ने बताया कि पहाड़, ठंडी हवा का मजा, रास्ते में ढाबों की चाय का स्वाद और दोस्तों के साथ मस्ती करनी थी, लेकिन इस ट्रिप पर उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने उनका अनुभव बदल दिया.

काजल ने बताया, “मुझे हमेशा से रोड ट्रिप्स का बहुत शौक रहा है. मैं कहीं भी जाती थी, तो रास्ता मैप्स से देख लेती थी और बिल्कुल पहले की तरह इस बार भी मैंने मैप्स की ही मदद ली. मैंने सोचा कि जब मोबाइल में रास्ता दिखाने वाला ऐप है, तो कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन इसी भरोसे ने हमें ऐसी जगह पहुंचा दिया, जहां कुछ देर के लिए लगा कि अब शायद वापस निकलना आसान नहीं होगा."

जब “शॉर्टकट” बना डर का रास्ता

काजल ने बताया कि शुरुआत में रास्ता थोड़ा सुनसान लगा, लेकिन हमने ध्यान नहीं दिया. सोचा कि पहाड़ों में ऐसे रास्ते आम होते हैं. कुछ किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद सड़क बहुत संकरी हो गई. एक तरफ पहाड़ और दूसरी तरफ गहरी ढलान. ऊपर से शाम ढलने लगी थी. आसपास न कोई गाड़ी दिख रही थी, न कोई दुकान, न कोई ढाबा. तभी पहली बार मन में डर आया कि कहीं हम गलत रास्ते पर तो नहीं आ गए.

"मैं बार-बार मैप्स देख रही थी और वही भरोसा दिला रहा था कि हम सही रास्ते पर हैं, लेकिन सामने जो रास्ता था, वह किसी भी तरह मेन रोड जैसा नहीं लग रहा था. सड़क जगह-जगह टूटी हुई थी, कहीं कच्ची, कहीं पत्थरों से भरी. एक मोड़ पर तो हालत ऐसी हो गई कि लगा अगर गाड़ी जरा भी फिसली, तो बड़ी मुश्किल हो सकती है."

जब नेटवर्क गया

सबसे बड़ी परेशानी तब हुई, जब अचानक फोन का नेटवर्क गायब हो गया. काजल ने आगे कहा, “अब न मैप्स ठीक से काम कर रहा था, न किसी को कॉल लग रही थी. उस वक्त समझ आया कि सिर्फ ऐप के भरोसे पहाड़ों का सफर करना कितनी बड़ी गलती हो सकती है.” 

गाड़ी में हम सब चुप हो गए थे. जो ट्रिप अब तक मजेदार लग रही थी, वही अब डरावनी फिल्म जैसी लगने लगी थी. रास्ता इतना सुनसान था कि दूर-दूर तक कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था. शाम अब अंधेरे में बदलने लगी थी. पहाड़ों में रात जल्दी हो जाती है और यह बात उस दिन बहुत बुरी तरह समझ आई. मुझे बस यही डर था कि अगर गाड़ी बीच रास्ते में बंद हो गई या टायर पंचर हो गया, तो हम क्या करेंगे.

कब आई सांस में सांस

करीब आधे घंटे की टेंशन के बाद हमें दूर एक छोटा सा घर दिखा. सच कहूं, तो उस वक्त ऐसा लगा जैसे किसी ने जान में जान डाल दी हो. हमने गाड़ी रोकी और वहां मौजूद लोकल लोगों से रास्ता पूछा. लोकल लोगों ने हमें सही रास्ता बताया और थोड़ा पानी भी दिया. उनकी मदद के बाद हम धीरे-धीरे मेन रोड तक पहुंच गए.

अगर आप भी रोड ट्रिप पर जा रहे हैं, तो ये बातें जरूर याद रखें

  • लोकल लोगों से भी रास्ता पूछें
  • रात में ड्राइव करने से बचें
  • फ्यूल और नेटवर्क पहले चेक करें
  • इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स हमेशा तैयार रखें

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