बच्चों की परवरिश सिर्फ उन्हें सही और गलत बताने तक सीमित नहीं है. माता-पिता का व्यवहार बच्चे के आत्मविश्वास और भावनात्मक विकास पर भी असर डालता है. कई बार छोटी-सी बात पर गुस्सा करने के बजाय अगर पेरेंट्स थोड़ा रुककर और समझदारी से बता दें, तो बच्चे के साथ रिश्ता और मजबूत हो सकता है. इंस्टाग्राम पर mansihasan नाम से एक पोस्ट शेयर की गई है. इस पोस्ट में एक्सपर्ट्स ने बताया कि पॉजिटिव पैरेंटिंग में डांट से ज्यादा संवाद और समझ को महत्व दिया जाता है. ऐसे में इन 5 आसान तरीकों को रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाया जा सकता है.
प्रतिक्रिया देने से पहले थोड़ा रुकें
इंस्टाग्राम में mansihasan नाम से एक पोस्ट शेयर किया गया है. इस पोस्ट में बताया गया है कि बच्चा कोई गलती करे तो तुरंत गुस्सा करने के बजाय कुछ सेकंड रुकें. यह छोटा-सा पॉज आपको शांत होकर बात करने का मौका देता है और बाद में पछताने वाली बात कहने से भी बचाता है.
बच्चे को शांत तरीके से समझाएं
उन्होंने आगे बताया कि बच्चे को गलती पर समझाना जरूरी है, लेकिन हर बार तेज आवाज में बोलना सही तरीका नहीं है. नियम तय करें और उन्हें शांत तरीके से समझाएं. इससे बच्चा अनुशासन को डर के बजाय जिम्मेदारी की तरह समझता है.
बच्चों को साफ शब्दों में समझाएं
उन्होंने आगे बताया कि सिर्फ यह कहने के बजाय कि 'भागो मत', बच्चे से कहें कि 'घर के अंदर धीरे चलो'. इससे बच्चे को साफ समझ आता है कि उससे उम्मीद क्या की जा रही है.
बच्चों को अकेले में समझाएं गलती
बता दें कि बच्चे की गलती सबके सामने बताने से उसका आत्मविश्वास कम हो सकता है. इसलिए उसे अकेले में समझाएं. वहीं, उसकी अच्छी कोशिश या उपलब्धि की तारीफ खुलकर करें.
गुस्सा हो जाएं तो माफी मांगने से न झिझकें
एक्सपर्ट्स ने बताया कि माता-पिता भी इंसान हैं और उनसे भी गलती हो सकती है. अगर गुस्से में बच्चे पर चिल्ला दिया है तो बाद में माफी मांगें. इससे बच्चा सीखता है कि गलती मानना कमजोरी नहीं, बल्कि रिश्ते को मजबूत बनाने की अच्छी आदत है.
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