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Guru Pradosh Vrat Katha: अक्टूबर में गुरु प्रदोष व्रत कब है? जानें प्रदोष व्रत कथा, पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

अक्टूबर के महीने में पहला प्रदोष व्रत गुरुवार को रखा जाएगा, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत भी कहा जाता है. यहां जानिए गुरु प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि.

Guru Pradosh Vrat Katha: अक्टूबर में गुरु प्रदोष व्रत कब है? जानें प्रदोष व्रत कथा, पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत
file photo

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है. हर महीने दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. अक्टूबर के महीने में पहला प्रदोष व्रत गुरुवार को रखा जाएगा, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और परेशानियों से छुटकारा मिलता है. चलिए आपको बताते हैं अक्टूबर में प्रदोष व्रत कब है. प्रदोष व्रत की कथा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त.

प्रदोष व्रत कब है?

पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी ति​थि 7 अक्टूबर को रात में 11 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 8 अक्टूबर को रात में 10 बजकर 15 मिनट होगा. ऐसे में उदयातिथि और प्रदोष मुहूर्त के आधार पर अक्टूबर का पहला प्रदोष 8 अक्टूबर गुरुवार को रखा जाएगा.

गुरु प्रदोष व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवगुरु बृहस्पति और देवताओं के बीच असुरों को लेकर युद्ध हुआ जिसमें देवताओं की विजय हुई. इस जीत के बाद देवगुरु बृहस्पति ने भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का विधान शुरू किया. एक अन्य कथा के अनुसार, एक नगर में एक वीतराग और धर्मपरायण ब्राह्मणी रहती थी जिसके पति की मृत्यु हो चुकी थी. वह अपने दोनों पुत्रों के साथ रहती थी. एक दिन उसका बेटा नदी पर नहाने गया और अचेत हो गया. गंधर्व कन्याओं ने उसकी सहायता की और बताया कि यह लड़का नगर के राजा के यहां चोरी के झूठे इल्जाम में फंसाया गया है.

ब्राह्मणी ने भगवान शिव का गुरु प्रदोष व्रत पूरी निष्ठा से किया व्रत के प्रभाव से राजा के सपने में शिवजी आए और उन्होंने आदेश दिया कि उस निर्दोष बालक को तुरंत रिहा किया जाए. राजा ने बालक को सम्मान सहित मुक्त किया और उसकी माता को धन-संपत्ति दी. इस प्रकार गुरु प्रदोष व्रत करने वाले के सभी कष्ट दूर होते हैं और आरोग्य, ज्ञान व सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

प्रदोष व्रत पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें.
प्रदोष काल यानी शाम के समय में शिव मंदिर जाएं या घर पर भगवान शिव का अभिषेक करें.
शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी अर्पित करें.
इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और आरती करें. पूजा के आखिर में प्रसाद बांटें.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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