Nautapa And Monsoon Connection: नौतपा की शुरुआत हो चुकी है. 25 मई से 2 जून तक नौतपा रहेगा, इन 9 दिनों को मौसम का सबसे गर्म दिन माना जाता है. उत्तरी और मध्य भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है, और कई जगहों पर पारा 45-48 डिग्री तक पहुंच गया है. भारतीय ज्योतिष और मौसम से जुड़ी लोक-मान्यताओं पर आधारित, यह नौ दिनों का समय हर साल मई के आखिर और जून की शुरुआत में सबसे ज्यादा गर्मी वाले दिन माने जाते हैं. इन नौ दिनों में घर से निकलना भी मुश्किल होता है, मौसम के ये सबसे गर्म दिन लोगों को सताते तो खूब हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसानों के लिए ये बेहद जरूरी होते है. नौतपा का कनेक्शन मानसून से भी होता है.

नौतपा क्या है? | What Is Nautapa?
नौतपा नौ दिनों का एक ऐसा समय है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह भारत में गर्मी के सबसे गर्म दिन लेकर आता है. यह शब्द हिंदी के दो शब्दों "नौ" (यानी 9) और "तपा" (यानी गर्मी) से बना है. यह आमतौर पर हर साल 25 या 26 मई के आस-पास शुरू होता है. पारंपरिक हिंदू ज्योतिष के अनुसार, नौतपा तब शुरू होता है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र (एक प्रमुख तारा/तारामंडल) में प्रवेश करता है. इस दौरान, सूर्य की किरणें बहुत तेज मानी जाती हैं, जो उत्तरी गोलार्ध पर लगभग सीधी पड़ती हैं, जिससे इस क्षेत्र में तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है.
किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है?
उत्तरी और मध्य भारत पर नौतपा का सबसे ज्यादा असर पड़ता है, जिसमें राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और बिहार शामिल हैं. इन इलाकों में अक्सर इस दौरान भीषण लू (हीटवेव) की स्थिति बनी रहती है.
क्या नौतपा का मानसून से कोई संबंध है? | Nautapa And Monsoon Connection
कई पारंपरिक मान्यताएं नौतपा को मॉनसून के मौसम से जोड़ती हैं. माना जाता है कि इन नौ दिनों में पड़ने वाली तेज गर्मी बाद में अच्छी बारिश के लिए जरूरी स्थितियां बनाने में मदद करती है. किसान लंबे समय से मॉनसून के पैटर्न का अंदाजा लगाने के लिए नौतपा को अहम मानते आए हैं. ऐसा माना जाता है कि तेज गर्मी की वजह से कम दबाव वाले क्षेत्र बनते हैं. यह भारत में नमी से भरी मानसूनी हवाओं को खींचने के लिए जरूरी है.
किसानों के लिए नौतपा क्यों जरूरी
- नौतपा, प्रकृति का ऐसा चक्र होता है जो हानिकारक जीवों की संख्या को नियंत्रित करता है.
- नौतपा के दौरान पड़ने वाली गर्मी कई ऐसे फफूंद, कीटों और बैक्टीरिया को खत्म करती है, जो बारिश के दौरान नुकसान पहुंचा सकते हैं.
- अगर नौतपा के दौरान तेज गर्मी न पड़े तो मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है.
- खेतों और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट बढ़ सकते हैं.
- फफूंद और बैक्टीरिया का खतरा होता है. साथ ही जहरीले और परजीवी जीवों की संख्या बढ़ सकती है.
लिहाजा नौतपा, धरती के लिए नेचुरल सैनिटाइजेशन की तरह है.
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