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​Natural Mango Ripening Tips: बिना केमिकल आम पकाने का देसी नुस्खा

​Organic Mango Ripening: आम खाने के हैं शौकीन, तो केमिकल वाले नहीं, बल्कि पुराने नुस्खे से पकाए आम का करें सेवन. इस आर्टिकल में जानें क्या है आम पकाने का देसी तरीका.

​Natural Mango Ripening Tips: बिना केमिकल आम पकाने का देसी नुस्खा
Mango Ripening Tips: घर पर आम कैसे पकाएं. (AI Generated Image)

How To Ripening Mango At Home: आम का नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाता है. लेकिन आज के समय में हम जब भी बाजार से आम खरीदते हैं, तो मन में सबसे पहला डर यही आता है कि कहीं इसे 'कैल्शियम कार्बाइड' या जहरीले केमिकल्स से तो नहीं पकाया गया? ये डर जायज भी है क्योंकि आजकल सिर्फ फलों में ही नहीं, बल्कि मार्केट में मिलने वाली ज्यादातर चीजों में मिलावट देखी जाती है. ​लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब ये पाउडर और इंजेक्शन नहीं होते थे, तब हमारे दादा-दादी और नाना-नानी आम कैसे पकाते थे? पुराने जमाने में आम पकाने का तरीका न सिर्फ सुरक्षित था, बल्कि उससे आम का असली स्वाद और खुशबू भी बनी रहती थी. आइए जानते हैं उन देसी तरीकों के बारे में.

आम पकाने का देसी तरीका- (Aam Pakane Ka Desi Tarika)

​1. घास और पुआल- 

​पुराने समय में आम पकाने का सबसे मशहूर तरीका था 'पाल' लगाना. इसमें एक अंधेरे कमरे में सूखी घास या पुआल (धान के छिलके पराली) की एक मोटी परत बिछाई जाती थी. इसके ऊपर कच्चे आमों को सलीके से रखा जाता था और फिर उन्हें ऊपर से भी घास से ढक दिया जाता था. पुआल के अंदर गर्मी पैदा होती थी, जिससे आम धीरे-धीरे और प्राकृतिक तरीके से पकते थे. इस तरह पके हुए आम का रंग गहरा पीला और स्वाद बेहद मीठा होता था.

​2. लकड़ी की पेटी और अखबार- 

​जब आमों को एक शहर से दूसरे शहर भेजना होता था, तो लकड़ी की पेटियों का इस्तेमाल होता था. इन पेटियों के अंदर अखबार या पुराने कागज बिछाए जाते थे. अखबार आम से निकलने वाली नमी को सोख लेता था और कागज की गर्मी से आम 3-4 दिन में पक कर तैयार हो जाते थे. आज भी कई बागान मालिक इसी तरीके को सबसे बेस्ट मानते हैं. 

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​3. अनाज की टंकी- 

​अगर आपके घर में अनाज की बड़ी टंकी या बोरे हैं, तो आपने देखा होगा कि बड़े-बुजुर्ग कच्चा आम काटकर उसके अंदर डाल देते थे. गेहूं या चावल के बीच में आम रखने से उसे एक समान तापमान मिलता है. अनाज की प्राकृतिक गर्मी (Natural Heat) आम के अंदर मौजूद एथिलीन गैस को एक्टिव कर देती है, जिससे आम प्राकृतिक रूप से पक जाता है. 

​4. जूट की बोरियां- 

​जल्दबाजी में आम पकाने के लिए जूट की बोरियों (टाट के बोरे) का सहारा लिया जाता था. कच्चे आमों को जूट की बोरी में लपेटकर किसी गरम जगह पर रख दिया जाता था. जूट के रेशे गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते, जिससे आम को पकने के लिए जरूरी गर्मी मिल जाती थी.

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