Lalbaugcha Raja 2026: हर साल जब गणेश चतुर्थी का त्योहार आता है तो मुंबई की गलियों से लेकर मंदिरों तक एक अलग ही खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई इस आयोजन का बेसब्री से इंतजार करता है. ऐसे में जब बात मुंबई की गणेश चतुर्थी की होती है तो हर किसी के मन में लालबागचा राजा मंदिर का नाम आता है. मुंबई का सबसे अधिक लोकप्रिय सार्वजनिक गणेश मंडल लालबागचा राजा लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है. लालबाग परेल क्षेत्र स्थित यह पंडाल हर साल गणेश चतुर्थी के दौरान दुनियाभर से भक्तों को अपनी ओर खींचता है. अगर आप भी इस साल लागबागचा राजा के दर्शन की प्लानिंग कर रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए ही है. आज हम आपको इस आयोजन की तारीख, रूट समेत जरूरी विधि बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं...
कब से शुरू हो रहा है लालबागचा राजा गणेशोत्सव?
लालबागचा राजा गणेशोत्सव 2026 की शुरुआत 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर होगी. वहीं, 25 सितंबर भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा. इस साल लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल अपने स्थापना के 93वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है. हर साल की तरह इस बार भी गणेश चतुर्थी के दिन तड़के सुबह भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी. इसके बाद पूरे उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सिलसिला लगभग 24 घंटे जारी रहेगा. बता दें कि देश-दुनिया से लाखों भक्त लालबागचा राजा के दर्शन के लिए मुंबई पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर बप्पा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं.
क्या रहेगी दर्शन की टाइमिंग?
लालबागचा राजा के दर्शन पूरे गणेशोत्सव के दौरान लगभग 24 घंटे यानी दिन-रात जारी रहते हैं. पिछले कुछ सालों के शेड्यूल को देखते हुए बात की जाए तो आम श्रद्धालुओं के लिए जनरल दर्शन सुबह करीब 5 बजे शुरू हो जाते हैं. वहीं, मुख दर्शन और चरण स्पर्श के लिए लाइनें सुबह 6 बजे खुलती हैं और देर रात तक चलती रहती हैं. हालांकि, ध्यान रहे कि हर साल श्रद्धालुओं की संख्या और बाकी व्यवस्थाओं के चलते दर्शन की टाइमिंग में बदलाव हो सकता है. ऐसे में आने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी जरूर ले लें.

ट्रेन से कैसे पहुंचें लालबागचा राजा?
मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन के लिए पहुंचने का सबसे आसान तरीका लोकल ट्रेन माना जाता है. दरअसल, गणेशोत्सव के दौरान पंडाल के आसपास की सड़कों पर भारी भीड़ और ट्रैफिक देखने को मिलता है, ऐसे में लोकल ट्रेन से यात्रा करना फायदेमंद माना जाता है. अगर आप सेंट्रल लाइन से आ रहे हैं, तो चिंचपोकली, करी रोड या परेल रेलवे स्टेशन पर उतर सकते हैं. वहीं वेस्टर्न लाइन के यात्रियों के लिए लोअर परेल स्टेशन सबसे सही ऑप्शन हो सकता है. इन स्टेशनों से लालबागचा राजा पंडाल तक पैदल पहुंचा जा सकता है.
क्या दर्शन के लिए कोई फीस लगती है?
लालबागचा राजा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की फीस या शुल्क नहीं देना होता है. मंडल श्रद्धालुओं से किसी भी तरह की फीस नहीं लेता है. ऐसे में अगर आपसे कोई वीआईपी दर्शन के नाम पर पैसों की मांग करें, तो सतर्क हो जाएं.
क्या लालबागचा राजा का इतिहास?
लालबागचा राजा मंडल की स्थापना साल 1934 में हुई थी. दरअसल, करीब नौ दशक पहले कुछ मछुआरों और दुकानदारों ने मिलकर बप्पा से बाजार के लिए एक पक्की जगह मिलने की मन्नत मांगी थी. जब उनकी यह मन्नत पूरी हुई तो उन्होंने आभार स्वरूप एक छोटी सी गणेश मूर्ति स्थापित की. वहीं से यह परंपरा शुरू हुई और आज 92 साल बाद भी पूरी आस्था के साथ निभाई जा रही है.
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