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माउंटेन लाइफ सिर्फ खूबसूरत नहीं, बजट फ्रेंडली भी हो सकती है? जानिए कहां बढ़ता है खर्च और कहां होती है बचत

Hill Station Living Cost: आज के समय में लोग शहरी जिदंगी से ज्यादा पहाड़ों में रहना पसंद कर रहे हैं. लेकिन वहां रहने का असली खर्च क्या होता है, इसे लेकर काफी कंफ्यूजन रहता है. अगर आप भी इसी सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल को पढ़ें.

माउंटेन लाइफ सिर्फ खूबसूरत नहीं, बजट फ्रेंडली भी हो सकती है? जानिए कहां बढ़ता है खर्च और कहां होती है बचत
माउंटेन लाइफ सिर्फ खूबसूरत नहीं, बजट फ्रेंडली भी हो सकती है? (AI Generated Image)

आजकल सोशल मीडिया पर पहाड़ों में रहने वाली जिंदगी काफी लोगों को आकर्षित कर रही है. शांत मौसम, कम भीड़, हरियाली और धीमी रफ्तार वाली लाइफ देखकर कई लोग बड़े शहर छोड़कर छोटे पहाड़ी इलाकों में कुछ समय के लिए ही सही, वहां बसने का सपना देखने लगे हैं. खासकर रिमोट वर्क और फ्रीलांसिंग बढ़ने के बाद हिमाचल, उत्तराखंड और दूसरे हिल स्टेशनों में लंबे समय तक रहने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर वहां रहने का खर्च कितना आता है? क्या सच में पहाड़ों की जिंदगी शहरों के मुकाबले सस्ती होती है या फिर सोशल मीडिया सिर्फ उसका खूबसूरत हिस्सा ही दिखाता है?

किराया कई शहरों से कम पड़ सकता है- (Rent Can Be Lower Than Big Cities)

कई छोटे पहाड़ी शहरों और गांवों में किराया बड़े शहरों के मुकाबले कम हो सकता है. खासकर अगर कोई व्यक्ति लंबे समय के लिए रूम या होमस्टे लेता है, तो उसे बेहतर डील मिल सकती है. हालांकि लोकेशन, सीजन और टूरिस्ट भीड़ के हिसाब से किराया तेजी से बदल भी सकता है. खासकर अगर आप रिमोट एरिया में रहना पसंद करते हैं तो ये खर्च आपकी उम्मीद से कम हो सकता है. पहाडों पर बने होम स्टे में आपको वैल फर्निश्ड किचन भी मिलता है जिसमें आप अपने हिसाब से ग्रोसरीज यानि महीने का राशन भरकर घर में ही बना खाना खा सकते हैं. अब बात पहाडों की है तो कई चीजें यहां शहर से सस्ती मिल जाती हैं, जबकि कुछ चीजें महंगी भी मिलती हैं.

खाने-पीने और बाहर घूमने का खर्च अलग-अलग- (Food And Lifestyle Costs Depend On Habits)

पहाड़ों में रहने का असली खर्च काफी हद तक लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है. अगर कोई रोज बाहर खाना खाता है, कैफे जाता है या ज्यादा घूमता-फिरता है, तो उसका बजट तेजी से बढ़ सकता है. वहीं लोकल मार्केट और घर के खाने पर रहने वाले लोगों का खर्च काफी कंट्रोल में रह सकता है.

पेट्रोल, इंटरनेट और रोजमर्रा के खर्च भी अहम- (Fuel, Internet And Daily Costs Matter Too)

हिल स्टेशनों में कई बार बाजार, कैफे या जरूरी जगहें दूर होती हैं, इसलिए पेट्रोल का खर्च भी बजट पर असर डाल सकता है. इसके अलावा वाई-फाई, मोबाइल नेटवर्क, बिजली बैकअप और जिम जैसी सुविधाओं पर भी लोगों को अलग से खर्च करना पड़ सकता है. कुछ जगहों पर ये सुविधाएं शहरों से महंगी पड़ती हैं, जबकि कुछ जगहों पर खर्च उम्मीद से कम भी हो सकता है.

दोस्तों के साथ रहने से कम हो सकता है बजट- (Sharing Expenses Can Reduce Costs)

कई लोग पहाड़ों में दोस्तों के साथ शिफ्ट होते हैं, जिससे किराया, ट्रैवल और दूसरी जरूरतों का खर्च आपस में बंट जाता है. ऐसे में अकेले रहने की तुलना में कुल खर्च काफी कम हो सकता है. पहाडों की शांति और सुकून तो सबको पसंद आता है, लेकिन शहरों में रहने वालों को यहां अकेलापन भी महसूस हो सकता है. ऐसे में अक्सर लोग यहां कुछ दोस्तों के साथ ही आना पसंद करते हैं.

इंस्टाग्राम वाली जिंदगी और असली जिंदगी में फर्क है- (Mountain Life Has Real Challenges Too)

पहाड़ों की जिंदगी जितनी शांत और खूबसूरत दिखती है, उसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं. कई जगहों पर हेल्थ फैसिलिटी, ट्रांसपोर्ट और मौसम जैसी चीजें लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए सिर्फ सोशल मीडिया देखकर पहाड़ों में बसने का फैसला लेने से पहले वहां के खर्च, सुविधाओं और लाइफस्टाइल को समझना जरूरी माना जाता है.

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