घर में घी या तेल नहीं है और लाइट चली गई है, तो परेशान मत होइए. अगर आपके घर में पांडव बत्ती पौधा है, तो आप इससे ही अपने घर को रोशन कर देंगे. जी हां, इस पौधे की पत्तियां बिल्कुल दीये में लौ की तरह जलती हैं और पूरे घर में रोशनी कर देती है. वैसे इस पौधे को लेकर यह भी मान्यता है कि यह महाभारत के समय का पौधा है, जब पांडवों को वनवास जाना पड़ा था, तो वह इस पौधे की पत्तियों को मसाल में जलाने के तौर पर इस्तेमाल करते थे. चलिए जानते हैं कि इस पौधे के क्या फायदे हैं और इन पत्तियों को कहां कहां इस्तेमाल किया जाता है. अगर आप इस पौधे को अपने घर में उगाते हैं, तो इसका इस्तेमाल कई बीमारियों जैसे सिर दर्द, मसूड़ों की मजबूती, चेहरे पर ग्लो लाने के लिए और पाचन शक्ति को मजबूत करने के लिए भी किया जाता है.
पांडव बत्ती पौधे की खूबियां
पांडव बत्ती पौधे का वैज्ञानिक नाम कैलिकार्पा टोमेंटोसा (Callicarpa tomentosa) है. यह एक दुर्लभ और खास पौधों में से एक है, जिसे अन्य क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानीय नामों से जाना जाता है. कुछ जगहों पर इसे पत्ता बत्ती और कपूर बत्ती वगैरह नामों से भी जाना जाता है, जबकि तेलुगू में इसे बोडिगा चेट्टू कहा गया है. यह पौधा भारत के पश्चिमी और पूर्वी घाटों के अलावा नमी वाले जंगलों में भी मिलता है. यही वजह है कि इसे बाकी घर में लगाए जाने वाले पौधों से थोड़ा अलग और खास माना गया है.
पांडव बत्ती नाम यूं पड़ा इस पौधे का
पौराणिक मान्यता के अनुसार, 12 साल के वनवास के दौरान पांडवों ने जंगल में रोशनी के लिए इस पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल किया था. कहते हैं कि वे पत्तियों पर तेल लगाकर उन्हें लकड़ी से बांध लेते थे और रात में मशाल की तरह इसका इस्तेमाल करते थे. इसी मान्यता से जुड़ी कहानी के कारण इस पौधे को पांडव बत्ती या पांडव पत्ती के नाम से जाना जाता है.

पांडव बत्ती की पत्तियों की खासियत
इस पौधे की पत्तियों की निचली सतह पर महीन, मखमली और सफेद रोएं होते हैं. इन पत्तियों पर तेल या घी डालने पर ये रोएं उसे अच्छे से सोख लेते हैं. इससे पत्ती को दीये में बत्ती की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इस पौधे की खास बात यह है कि पत्ती जलने के तुरंत बाद राख में नहीं बदलती है, बल्कि तेल के सहारे काफी देर धीमी आंच में जलती रहती है.
बालकनी में ऐसे उगाएं पांडव बत्ती का पौधा
अगर आप घर में पांडव बत्ती का पौधा लगाना चाहते हैं, तो 14 से 16 इंच गहरा मिट्टी या सिरेमिक का गमला ले लें. गमले में पानी की निकासी के लिए तले में एक छेद होना जरूरी है, ताकि जड़ों में पानी जमा न हो और एक्स्ट्रा पानी वहां से निकल जाए. इसके लिए करीब 40 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 प्रतिशत वर्मीकम्पोस्ट और 30 प्रतिशत रेत या कोकोपीट मिलाकर ऐसा मिश्रण तैयार करें, जिसमें पानी आसानी से निकल जाए.
पौधे को बालकनी में ऐसी जगह रखें, जहां सुबह करीब 3 से 4 घंटे तक हल्की धूप आती हो. दोपहर की तेज और सीधी धूप से इस पौधे को बचाना होगा. पानी तभी दें, जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूख जाए. पत्तियों की नमी बनाए रखने के लिए हफ्ते में एक या दो बार हल्का पानी स्प्रे कर सकते हैं.
पूजा में ऐसे करें पांडव बत्ती की पत्ती का इस्तेमाल
पूजा के समय इसकी ताजी या हल्की सूखी पत्ती को सावधानी से रोल करके तेल में डुबो दें. इसके बाद इसे दीये में बत्ती की तरह इस्तेमाल करें. हल्की सूखी पत्ती से ही बत्ती अच्छे से बनेगी.
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प्रस्तुति : दीपांशी
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