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क्या वाकई रोज 10 मिनट मिट्टी में चलने से कम हो सकता है स्ट्रेस? योगा के अलावा ऐसे 5 अनोखे तरीके जिनसे दूर होता है तनाव

Unique Ways to Relieve Stress: अपने योग, ध्यान और ब्रीदिंग एक्सरसाइज से स्ट्रेस कम होने की बातें तो सुनी होंगी, लेकिन क्या आप कुछ ऐसे अनोखे तरीकों के बारे में जानते हैं जिन्हें साइंस भी कारगर मानता है?

क्या वाकई रोज 10 मिनट मिट्टी में चलने से कम हो सकता है स्ट्रेस? योगा के अलावा ऐसे 5 अनोखे तरीके जिनसे दूर होता है तनाव
तनाव कम करने के नए और नेचुरल तरीके.

Natural Ways to Reduce Stress: आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में तनाव यानी स्ट्रेस लगभग हर व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. काम का दबाव, डिजिटल स्क्रीन पर लंबा समय, नींद की कमी और लगातार भागदौड़ हमारी मेंटल हेल्थ पर गहरा असर डालते हैं. यही वजह है कि आज दुनिया भर में लोग तनाव कम करने के नए और प्राकृतिक तरीकों की तलाश कर रहे हैं. योग और ध्यान जैसे पारंपरिक उपाय तो पहले से लोकप्रिय हैं, लेकिन कुछ सालों में वैज्ञानिकों ने प्रकृति से जुड़े कुछ बेहद सरल तरीकों पर भी शोध किया है. इनमें मिट्टी या घास पर नंगे पैर चलना, प्रकृति के बीच समय बिताना और जमीन के सीधे संपर्क में आना शामिल है. कई स्टडी बताती हैं कि ऐसे छोटे-छोटे बदलाव भी मानसिक तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं.

स्ट्रेस कम करने के नेचुरल और अनोखे तरीके | Natural And Unique Ways to Reduce Stress

1. मिट्टी में चलना

पिछले कुछ सालों में वैज्ञानिकों ने अर्थिंग या ग्राउंडिंग पर कई अध्ययन किए हैं. इसमें व्यक्ति जमीन या मिट्टी के सीधे संपर्क में आता है, जैसे नंगे पैर मिट्टी पर चलना. साल 2012 में जर्नल ऑफ एनवायरमेंट एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक रिव्यू स्टडी में बताया गया कि धरती के संपर्क में आने से शरीर में इलेक्ट्रॉन्स का संतुलन बेहतर हो सकता है, जिससे सूजन, नींद की समस्या और तनाव कम होने में मदद मिल सकती है.

इस स्टडी के अनुसार, पृथ्वी की सतह पर मौजूद प्राकृतिक इलेक्ट्रॉन्स शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को बैलेंस करने में मदद कर सकते हैं. यही कारण है कि कुछ लोगों को मिट्टी या जमीन पर नंगे पैर चलने से मानसिक शांति और रिलैक्सेशन महसूस होता है.

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2. घास पर नंगे पैर चलने से दिमाग को मिलती है शांति

घास पर नंगे पैर चलना भी स्ट्रेस कम करने का एक आसान और लोकप्रिय तरीका माना जाता है. इसे भी अर्थिंग का ही एक रूप माना जाता है. साल 2019 में द जर्नल ऑफ साइंस एंड हीलिंग में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जमीन के सीधे संपर्क में आने से कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) लेवल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, जब व्यक्ति घास या मिट्टी पर चलता है, तो शरीर और प्रकृति के बीच एक तरह का बायोलॉजिकल इंस्ट्रेक्शन  बनता है, जो मानसिक शांति और नींद की क्वालिटी को बेहतर बना सकता है.

3. फॉरेस्ट बाथिंग, पेड़ों के बीच समय बिताना

जापान में शिनरिन-योकू (Forest Bathing) नाम से एक तरीका लोकप्रिय है, जिसमें लोग जंगल या हरियाली वाले स्थानों में समय बिताते हैं. साल 2010 में एनवायरमेंटल हेल्थ एंड प्रिवेंशन मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में पाया गया कि जंगल में समय बिताने से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल लेवल कम हो सकता है और मूड बेहतर हो सकता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, पेड़ों की खुशबू, प्राकृतिक आवाजें और शांत वातावरण दिमाग को आराम देने में मदद करते हैं.

4. मिट्टी से संपर्क और हैप्पी बैक्टीरिया

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि मिट्टी में मौजूद कुछ सूक्ष्म जीव भी मेंटल हेल्थ पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं. साल 2007 में न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च में बताया गया कि मिट्टी में पाया जाने वाला बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम वैके दिमाग में सेरोटोनिन (मूड सुधारने वाला रसायन) के लेवल को प्रभावित कर सकता है. इसका मतलब यह हो सकता है कि बागवानी करना या मिट्टी के संपर्क में आना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है.

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5. डिजिटल डिटॉक्स और प्रकृति

एक और तरीका जो तनाव कम करने में मदद कर सकता है, वह है डिजिटल डिटॉक्स यानी कुछ समय के लिए मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाना. कई रिसर्च बताती हैं कि लगातार स्क्रीन पर रहने से दिमाग थक जाता है और तनाव बढ़ सकता है. जब हम प्रकृति के बीच समय बिताते हैं, तो दिमाग को आराम मिलता है और ध्यान क्षमता बेहतर हो सकती है.

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