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ग्लास स्किन, स्लगिंग या स्किन साइक्लिंग? एक्सपर्ट ने बताया भारतीय त्वचा के लिए कौन सा स्किनकेयर ट्रेंड सच में करता है काम

किसी भी स्किनकेयर ट्रेंड को फॉलो करने से पहले अपनी त्वचा के प्रकार, मौसम और जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि हर ट्रेंड हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सही नहीं होता.

ग्लास स्किन, स्लगिंग या स्किन साइक्लिंग? एक्सपर्ट ने बताया भारतीय त्वचा के लिए कौन सा स्किनकेयर ट्रेंड सच में करता है काम
स्किन केयर
file photo

आजकल सोशल मीडिया की वजह से ग्लास स्किन, स्किन साइक्लिंग और स्लगिंग जैसे स्किनकेयर ट्रेंड्स काफी प्रसिद्ध हो गए हैं. लोग इन ट्रेंड्स को अपनाकर बेहतरीन त्वचा पाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, इनमें से ज्यादातर ट्रेंड्स दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों से आए हैं, इसलिए जरूरी नहीं कि ये भारतीय त्वचा पर भी उसी तरह असर करें. एचटी से बात करते हुए Brilliance Cosmocare के संस्थापक और एस्थेटिक सर्जन डॉ. अशोक पटेल ने बताया कि कौन-से स्किनकेयर ट्रेंड भारतीय त्वचा के लिए फायदेमंद हैं और किन्हें अपनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए. उनके अनुसार, किसी भी स्किनकेयर ट्रेंड को फॉलो करने से पहले अपनी त्वचा के प्रकार, मौसम और जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि हर ट्रेंड हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सही नहीं होता.

ग्लास स्किन

डॉ. अशोक पटेल के मुताबिक, ग्लास स्किन ट्रेंड की शुरुआत दक्षिण कोरिया से हुई थी, जहां साफ, चमकदार और बिना दाग-धब्बों वाली त्वचा को खूबसूरती का प्रतीक माना जाता है. वहीं, स्किन साइक्लिंग का ट्रेंड अमेरिका से आया, जिसे स्किन केयर प्रोडक्ट्स के सही इस्तेमाल का तरीका माना जाता है. हालांकि, ये दोनों ट्रेंड सोशल मीडिया और फोटो में काफी मनमोहक दिखते हैं, लेकिन इन्हें खास तौर पर भारतीय त्वचा को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया था. इसलिए भारतीय मौसम और स्किन टाइप पर इनका असर हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है.

स्किन साइक्लिंग

डॉ. अशोक पटेल का कहना है कि ग्लास स्किन पाने के लिए बहुत सारे प्रोडक्ट्स खरीदने या लंबा स्किनकेयर रूटीन अपनाने की जरूरत नहीं होती. उनके अनुसार, कम प्रोडक्ट्स का नियमित और सही तरीके से इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद होता है. जितना ज्यादा आप त्वचा पर अलग-अलग प्रोडक्ट्स की परतें चढ़ाएंगे, जरूरी नहीं कि उतना बेहतर रिजल्ट मिले. वहीं, स्किन साइक्लिंग में रेटिनॉल और एक्सफोलिएटिंग एसिड जैसे एक्टिव इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल कुछ रातों में किया जाता है, जबकि बाकी रातों में त्वचा को आराम और रिकवरी का समय दिया जाता है. उनके मुताबिक, इस तरीके से त्वचा को लगातार एक्टिव प्रोडक्ट्स का दबाव नहीं झेलना पड़ता और उसे खुद को रिपेयर करने का मौका मिलता है. इससे जलन, लालिमा और स्किन बैरियर डैमेज होने का खतरा भी कम हो सकता है.

स्लगिंग

स्लगिंग एक ऐसा स्किनकेयर ट्रेंड है, जिसमें रात में स्किन केयर प्रोडक्ट्स लगाने के बाद ऊपर से पेट्रोलियम जेली या कोई मोटी मॉइस्चराइजिंग परत लगाई जाती है, ताकि त्वचा की नमी लॉक हो जाए और रातभर बनी रहे. डॉ. अशोक पटेल के अनुसार, यह तरीका बहुत ड्राई या कमजोर स्किन बैरियर वाली त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकता है. इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और उसे रिपेयर होने में मदद मिलती है. हालांकि, यह ट्रेंड हर किसी के लिए सही नहीं है. अगर आपकी त्वचा ऑयली है या आपको अक्सर पिंपल्स और एक्ने की समस्या रहती है, तो स्लगिंग आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है. इससे रोमछिद्र (पोर्स) बंद हो सकते हैं और ब्रेकआउट्स बढ़ सकते हैं.

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