ज्यादातर लोग फिट रहने के लिए सबसे पहले पैदल चलना शुरू करते हैं. रोजाना कुछ देर की वॉक करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, वजन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है, दिमाग को सुकून मिलता है और कई बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है, लेकिन अगर आपको बेहतर फिटनेस, ज्यादा एनर्जी या शरीर में बड़ा बदलाव लाना है, तो सिर्फ रोज टहलना ही काफी नहीं होता. चलिए आपको बताते हैं इस संबंध में फिटनेस कोच का क्या कहना है.
एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, फिटनेस एक्सपर्ट और सुमित दुबे फिटनेस के संस्थापक सुमित दुबे का कहना है कि कई लोगों को लगता है कि वह रोजाना वॉक करने से वे पूरी तरह फिट हो जाएंगे. हालांकि, फिटनेस हासिल करने के लिए शरीर को अलग-अलग तरह की एक्टिविटी और सही लाइफस्टाइल की भी जरूरत होती है. यही वजह है कि कई बार नियमित वॉक करने के बावजूद लोगों को अच्छे रिजल्ट नहीं मिल पाते.
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फिटनेस के लिए सिर्फ धीरे-धीरे चलना काफी नहीं
फिटनेस एक्सपर्ट सुमित दुबे के अनुसार, वॉक करते समय उसकी स्पीड भी बहुत मायने रखती है. अगर आप हमेशा आरामदायक रफ्तार से चलते हैं, तो दिल और फेफड़ों को उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती, जिससे कार्डियो फिटनेस में ज्यादा सुधार नहीं होता. हालांकि, धीमी वॉक भी शरीर के लिए फायदेमंद है, लेकिन कैलोरी बर्न करने और शरीर में ऑक्सीजन की खपत बढ़ाने के लिए थोड़ा तेज चलना बेहतर माना जाता है. ऐसी गति रखें जिसमें आप बात तो कर सकें, लेकिन आसानी से गाना न गा पाएं.
रोज एक जैसी वॉक करने से प्रोग्रेस रुक सकती है
कई लोग हर दिन एक ही रास्ते, एक ही स्पीड और एक ही समय पर वॉक करते हैं. इससे शरीर उस रूटीन का आदी हो जाता है और कुछ समय बाद फिटनेस में सुधार की रफ्तार धीमी पड़ जाती है. इसलिए अपनी वॉक में बदलाव लाने की कोशिश करें. कभी तेज और धीमी चाल को मिलाकर चलें, कभी दूरी बढ़ाएं या ढलान वाली जगह पर वॉक करें. इस तरह की से दिल और शरीर को नई चुनौती मिलती है और बेहतर रिजल्ट देखने को मिल सकते हैं.
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को नजरअंदाज न करें
सिर्फ पैदल चलना ही पूरी फिटनेस के लिए पर्याप्त नहीं है. अच्छी फिटनेस में दिल की सेहत, ताकत, संतुलन, लचीलापन और शरीर की मूवमेंट क्षमता सभी शामिल होती हैं. खासकर 30 साल की उम्र के बाद शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं, अगर उन्हें चुनौती न दी जाए. केवल वॉक करने से इस बदलाव को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता.
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