Relationships Tips: प्यार की शुरुआत अक्सर बहुत खूबसूरत होती है. शुरुआत में हर मैसेज खास लगता है, हर मुलाकात में एक्साइटमेंट होती है और सामने वाला इंसान सबसे ज्यादा समझदार लगता है. लेकिन, समय के साथ-साथ कई रिश्तों में एक अजीब-सी थकान आने लगती है. लोग कहते हैं, प्यार तो है, लेकिन अब पहले जैसी एनर्जी नहीं बची. सवाल ये है कि जब प्यार खत्म नहीं हुआ, तो फिर लोग प्यार निभाते-निभाते थक क्यों जाते हैं? असल में, रिश्तों की थकान अचानक नहीं आती. यह धीरे-धीरे जमा होती है छोटी-छोटी उम्मीदों, अनकही बातों और रोजमर्रा के दबावों के साथ.
प्यार निभाते-निभाते थक क्यों जाते हैं लोग? | Why do people get tired of maintaining a loving relationship?
1. जरूरत से ज्यादा एडजस्ट करना
रिश्ते में समझौता ज़रूरी होता है, लेकिन जब एक ही इंसान बार-बार एडजस्ट करता रहे, तो अंदर ही अंदर थकान जमा होने लगती है. अपनी पसंद, अपनी जरूरतें और अपनी भावनाएं दबाने से इंसान इमोशनली थक जाता है.

2. इमोशनल सपोर्ट एकतरफा हो जाना
कई रिश्तों में एक पार्टनर हमेशा सुनने वाला बन जाता है समझने वाला, संभालने वाला. अगर बदले में उसे वही इमोशनल सपोर्ट न मिले, तो वह धीरे-धीरे खाली महसूस करने लगता है. प्यार तब भारी लगने लगता है, जब देने वाला ही थक जाए.
3. कम्युनिकेशन की कमी
शुरुआत में हर बात शेयर होती है, लेकिन समय के साथ बातचीत कम हो जाती है. जब छोटी-छोटी परेशानियां बोली नहीं जातीं, तो वे अंदर जमा होकर बड़ी थकान बन जाती हैं. कहकर क्या फायदा? वाला एटिट्यूड रिश्ते को धीरे-धीरे बोझ बना देता है.
4. एक्सपेक्टेशन्स का बढ़ता बोझ
रिश्ते में उम्मीदें होना गलत नहीं है, लेकिन जब एक्सपेक्टेशन्स बहुत ज्यादा हो जाएं, हर समय परफेक्ट बिहेवियर, तुरंत रिप्लाई, अटेंशन तो प्यार दबाव में बदलने लगता है. इंसान प्यार निभाने के बजाय उसे निभाने की जिम्मेदारी समझने लगता है.
5. खुद के लिए समय न मिलना
जब रिश्ता पूरी जिंदगी का सेंटर बन जाए और इंसान खुद के दोस्तों, रुचियों और आराम को भूल जाए, तो बर्न आउट होना तय है. मी टाइम की कमी रिश्ते में इरिटेबिलिटी और थकान बढ़ा देती है.

6. अनसुलझे झगड़े
लड़ाइयां होना नॉर्मल है, लेकिन अगर वे सुलझाई न जाएं और बस दबा दी जाएं, तो वे रिश्ते की एनर्जी खा जाती हैं. पुराने मुद्दे बार-बार याद आना इमोशनल थकान की बड़ी वजह बनता है.
प्यार में थक जाना इसका मतलब नहीं कि प्यार खत्म हो गया है. कई बार इसका मतलब होता है कि रिश्ता ध्यान, संतुलन और ईमानदार बातचीत मांग रहा है. जब दोनों पार्टनर खुद को भी उतनी ही अहमियत दें, जितनी रिश्ते को देते हैं, तब प्यार बोझ नहीं, बल्कि सुकून बनता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं