Relationship Advice: आज के समय में रिश्ते पहले से ज्यादा जुड़े हुए दिखते हैं. मोबाइल हाथ में है, इंटरनेट तेज है और बात करने के मौके अनगिनत हैं. सुबह आंख खुलते ही गुड मॉर्निंग, दिनभर कॉल्स, चैट्स, रिल्स शेयर करना और रात को गुड नाइट कहकर सो जाना सब कुछ नॉर्मल है. बाहर से देखने पर लगता है कि रिश्तों में दूरी की कोई वजह ही नहीं बची. फिर भी बहुत से लोग अंदर से यह महसूस करते हैं कि हम पास होकर भी दूर हैं. सवाल यह है जब बात हो रही है, तो दूरी क्यों बढ़ रही है? आइए समझते हैं ऐसा क्यों महसूस होता है.
बात और जुड़ाव में फर्क समझिए:
- हर बातचीत जुड़ाव नहीं होती.
- आज ऑफिस में ये हुआ.
- मैं घर पहुंच गया.
- तुमने खाना खाया?
ये सब बातें जरूरी हैं, लेकिन इनमें भावनाएं कम होती हैं. इमोशनल कनेक्शन तब बनता है जब हम अपने डर, थकान, उलझन और खुशी को साझा करते हैं. आज के रिश्तों में अपडेट्स ज्यादा हैं, फीलिंग कम.
फोन पर साथ, दिल से दूर
मोबाइल ने रिश्तों को आसान बनाया है, लेकिन एक खतरा भी पैदा किया है. हम सामने वाले की आवाज तो सुनते हैं, लेकिन उसका मन नहीं. कई बार पार्टनर कुछ कहना चाहता है, लेकिन जवाब मिलता है अभी बिजी हूं, बाद में बात करेंगे. धीरे-धीरे सामने वाला बोलना कम कर देता है. यहीं से इमोशनल डिस्टेंस शुरू होती है.

सब ठीक है की आदत:
- आज के रिश्तों की सबसे बड़ी समस्या है, खुद को मजबूत दिखाने की मजबूरी.
- दुख हो, गुस्सा हो या अकेलापन सब पर एक ही जवाब: मैं ठीक हूं.
लेकिन जब फिलिंग्स दबती रहती हैं, तो रिश्ता बाहर से शांत और अंदर से खाली हो जाता है.
साथ होने के बाद भी डिस्कनेक्ट:
एक ही कमरे में बैठकर अलग-अलग स्क्रीन देखना, साथ खाना लेकिन बिना बात किए यह आज की आम तस्वीर है. रिश्ते में सिर्फ़ साथ रहना काफी नहीं, इमोशनल प्रजेंस रहना जरूरी है.
दूरी कैसे कम करें?
- हर दिन कुछ मिनट बिना फोन के बात करें.
- जवाब देने से पहले सुनें.
- सिर्फ़ क्या हुआ नहीं, कैसा लगा ये पूछें.
- सामने वाले की भावनाओं को छोटा न समझें.
आज के रिश्तों को ज्यादा बातों की नहीं, सच्ची बातों की जरूरत है, क्योंकि रिश्ता शब्दों से नहीं, समझ से मजबूत होता है.
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