Combination Therapy: स्किनकेयर की दुनिया में अक्सर एक कोई न कोई चमत्कारी इंग्रेडिएंट खोजने की होड़ लगी रहती है. कभी कहा जाता है कि रेटिनॉल ही एंटी-एजिंग का अंतिम समाधान है, तो कभी विटामिन C को सबसे बेहतर ब्राइटनिंग एजेंट बताया जाता है. वहीं, सैलिसिलिक एसिड को पोर्स साफ करने का नंबर-वन तरीका माना जाता है, लेकिन त्वचा विशेषज्ञ डॉ. मार्क स्ट्रॉम का कहना है कि स्किनकेयर उतना प्रभावी तब नहीं होता जब हम एक ही एक्टिव पर निर्भर रहें, बल्कि तब जब सही इंग्रेडिएंट्स को एक साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाए. इसे डर्मेटोलॉजी में कंबीनेशन थेरेपी कहा जाता है. यह तरीका इंग्रेडिएंट्स के ‘सिनर्जी' यानी उनकी साथ‑में‑काम करने की क्षमता पर आधारित है. इससे न सिर्फ कई स्किन समस्याओं को एक साथ टारगेट किया जा सकता है, बल्कि तेज एक्टिव्स के कारण होने वाले साइड इफेक्ट भी कम होते हैं.
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रेटिनॉल और पेप्टाइड्स
रेटिनॉल को सेल टर्नओवर बढ़ाने और कोलेजन बनाने में कारगर माना जाता है, लेकिन सूखापन और जलन इसका एक बड़ा नुकसान है. कई लोग इसी वजह से रेटिनॉल का इस्तेमाल बीच में ही छोड़ देते हैं. डॉ. स्ट्रॉम के मुताबिक, रेटिनॉल को पेप्टाइड्स के साथ इस्तेमाल करें. पेप्टाइड्स त्वचा को रिपेयर करने का सिग्नल देते हैं और स्किन बैरियर को मजबूत बनाते हैं यानी रेटिनॉल नए सेल बनाता है और पेप्टाइड्स त्वचा को सहारा देते हैं ताकि जलन और रैश की समस्या न हो.
सैलिसिलिक एसिड और नायसिनामाइडसैलिसिलिक एसिड पोर्स के अंदर तक जाकर तेल और गंदगी हटाता है, लेकिन इसका इतना डीप एक्सफोलिएशन कई बार लालिमा और सूखापन बढ़ा देता है. इसलिए इसे नायसिनामाइड के साथ जोड़ना बेहतर होता है. नायसिनामाइड तेल संतुलन, सूजन को कम करने और स्किन बैरियर को मजबूत करने में मदद करता है. एक साफ करता है, दूसरा त्वचा को शांत और सुरक्षित रखता है. इस तरह दोनों साथ मिलकर मुहांसों और अन्य समस्या को कंट्रोल करते हैं.
एडैपलीन और एजेलाइक एसिडबहुत से लोग पिंपल्स से ज्यादा परेशान उनके पीछे छूट जाने वाले धब्बों से होते हैं. डॉ. स्ट्रॉम के मुताबिक, एडैपलीन और एजेलाइक एसिड की जोड़ी की सलाह देते हैं. एडैपलीन एक रेटिनॉइड है जो पोर्स को बंद होने से रोकता है, जबकि एज़ेलाइक एसिड बैक्टीरिया मारता है और पिगमेंटेशन कम करता है यानी यह एक्टिव पिंपल को रोकता है और दूसरा दाग-धब्बों को हल्का करता है.
ग्लाइकोलिक एसिड और सनस्क्रीनग्लाइकोलिक एसिड मृत त्वचा हटाकर नई त्वचा को सामने लाता है, लेकिन इससे सन सेंसिटिविटी बहुत बढ़ जाती है. इसलिए इसका इस्तेमाल सनस्क्रीन के बिना संभव ही नहीं. अगर सनस्क्रीन न लगाया जाए तो UV किरणें नई त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे एक्सफोलिएशन का पूरा फायदा खत्म हो जाता है.
विटामिन C और एजेलाइक एसिडहाई मात्रा में विटामिन C संवेदनशील त्वचा पर जलन कर सकता है. इसलिए इसे माइल्ड डोज में एज़ेलाइक एसिड के साथ जोड़कर इस्तेमाल करना बेहतर है. यह कॉम्बिनेशन पिगमेंटेशन को दो तरीकों से कम करता है और लालिमा भी घटाता है.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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